पहली बारिश में4 5 लाख का स्टॉप डेम पानी में बहा
मगरलोड विकासखंड के ग्राम हरदी में वाटरशेड परियोजना का मामला
मगरलोड /ब्लॉक मुख्यालय से मात्र 17 किलोमीटर दूर महानदी किनारे बसा ग्राम हरदी में वाटरशेड परियोजना के द्वारा नाला में स्टाफ डैम का निर्माण कराया गया है ।कार्य की लागत इकाई लगभग 45 लख रुपए है।कृषि विभागके द्वारा संचालित यह वाटर सेट परियोजना खेती मे फायदे के उद्देश्य से लाखों करोड़ों का निर्माण कार्य पूर्ण करवाती है। हरदी में बनाया गया स्टॉप डेम महानदी से मात्र 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया हैजिसमें वाटरशेड परियोजना के सब इंजीनियर के देखरेख में कार्य पूरा किया गया है ।ग्राम हरदी के स्टॉप डेम निर्माण स्थल का हाल बया करता यह निर्माण कार्य अपने गलत इंजीनियरिंग और खराब निर्माण कार्य का जीता जागता मिशाल पेश कर रहा है। खराब तकनीकी और खराब गुणवत्ता निर्माण कार्य किया जा रहा है जिसका खामियाजा किसानो आम नागरिको को भुगतना पड़ेगा । शासन के पैसे का खुलेआम बर्बादी का है जो निर्माण स्थल का नजारा बया कर रही है। यह निर्माण कार्य महानदी नदी से मात्र 50 मीटर के लगभग ऊपर रेतीला स्थल पर बनाया गया है। नाले की चौड़ाई से लगभग 5 फीट दूरी पर बंण्ड दीवार का निर्माण कराया जा रहा है। स्टॉप डेम निर्माण में घोर लापरवाही बरतते हुए तकनीकी मापदण्ड और मटेरियल गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है ।ग्रामीणों ने बताया कि इस निर्माण के मैटेरियल सप्लाई जिला पंचायत के सभापति मीणा डेमू साहू के द्वारा किया जा रहा है एवंउनके प्रतिनिधिके द्वारा निर्माणकार्य की देखरेख किया जा रहा है। इस निर्माण से ग्राम हरदी ,बिलौदी ,धोराभाठा ,भोथा सहित अन्य गांव के किसानों का लगभग 300 से 400 एकड़ खेतों में सिंचाई का साधन उपलब्ध कराना था। निर्माण कार्य की योजना में शामिल किया गया था। निर्माण स्थल पर ना कोई सूचना बोर्ड लगा है ना कोईनिर्माण से संबंधित जानकारी लगा है न कहीं उल्लेख है। वाटरशेड परियोजना की सब इंजीनियर खेमन लाल साहू से इस संबंध में जानकारी लेना चाहा तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ ते हुए अपने कृषि विभाग के उच्च अधिकारी उपसंचालक मोनेश साहू से बात करने के लिए बोल दिया गया। इस संबंध में मोनेश साहू से संपर्क करना चाहा तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया जिससे उनका पक्ष नहीं लिया गया।
45 लाख का स्टॉप डैम पहली बारिश की मार को भी नहीं झेल पाए /
वाटरशेड परियोजना के तहत किसानों को सिंचाई लाभ एवं पानी संग्रहणऔर भूजल स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। गुणवत्ताहीन मटेरियल एवं खराब तकनीक से बनाया गया था जो प्रथम बारिश में ही टूट कर बह गया ।
अकुशल वर्कर के भरोसे लाखों का निर्माण कार्य /
वाटर सेट योजना के तहत बनाई जा रही है स्टाफ डैम में अकुशल श्रमिकों से कार्य कराया जा रहा है। तकनीकी ज्ञान के बिना यह कार्य कराया गया है जिनका परिणाम है कि शासन के लाखों रुपया पानी में बह गया ।इस नुकसान का जिम्मेदार विभाग लेगा या अधीनस्थ अधिकारी ,कर्मचारी इस की वसूली किनसे की जाएगी यह बात अभी तक तय नहीं हुआ है।
सरपंच मनोहर लाल ध्रुव ग्राम पंचायत हरदी/
स्टॉप डैम निर्माण कार्य में कृषि विभाग के वाटर सेट के द्वारा कराया जा रहा है ।निर्माण के सभी कागजात और सील, पैड विभागीय व्यक्ति रखते हैं सरपंच से मात्र हस्ताक्षर करवाते हैं। तथा समिति की किसी भी सदस्य की पूछपरख एवं जानकारी नहीं देते हैं। पंच साधुराम साहू ने बताया स्टाफ डेम निर्माण की जानकारी आज तक पंचायत को नहीं दिया गया है ।ग्रामीणों को मजदूरी कार्य में ले जाया जाता है ।कार्य के संबंध में विभागीय इंजीनियर एवं जिला पंचायतसभापति के प्रतिनिधि को बोला गया थालेकिन उन्होंने इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया ।
लाखों के कार्य पर नहीं है कोई सूचना बोर्ड /
वाटरशेड परियोजना के द्वारा कराया जा रहा लाखों रुपए के कार्य पर कोई नागरिक सूचना बोर्ड नहीं बनाया गया है जिसे आम नागरिकों को उसे निर्माण कार्य के संबंध में कहीं कोई जानकारी नहीं मिल रही है।जिससे विभागीय कार्य की लीपापोती कार्य करने की आशंका बढ़ गई है।
स्टॉप डैमनिर्माण की इंजीनियरिंग पर उठ रहे हैं सवाल /
लाखों रुपए की लागत से कराई गई स्टाफ डेम निर्माण कार्य में जिस इंजीनियरिंग का तकनीक उपयोग किया गया है उस पर सवाल उठ रहे हैं। रेतीला मिट्टी में इस प्रकार के निर्माण कार्य एवं सामग्री की गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखना इस घटना को अंजाम देना स्वाभाविक परी लक्षित होता है । इस खराब इंजीनियरिंग और तकनीक का नतीजा है की लाखों का निर्माण कार्य पहली बारिश में बह गया।


