छत्तीसगढ़ क्वांटीफायबल डाटा आयोग रिपोर्ट हुई लीक...
आबादी में पहले नंबर में साहू, दूसरे पर यादव..तो पांचवे पर कुर्मी...?
रिपोर्ट: -डेकेश्वर (डीके) ठाकुर
गरियाबंद । छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोग की रिपोर्ट का मुद्दा बजट सत्र में कुरूद विधायक अजय चंद्राकर के सवाल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा रिपोर्ट को सार्वजनिक किये जाने हेतु विचार किये जाने के आश्वासन के कुछ ही दिनों के बाद क्वांटीफायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट के कुछ हिस्से सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक होते ही अनेक चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं इसके अनुसार राज्य में ओबीसी वर्ग की सम्मिलित आबादी कुल सवा करोड़ के आस-पास बताई गई है इसमें साहू-तेली समाज से जुड़ी जातियों की जनसंख्या लगभग 30 लाख के करीब है जोकि कुल ओबीसी आबादी की 24% से अधिक है दूसरे नंबर पर 18.12 % आबादी के साथ यादव राउत समाज से जुड़ी जातियां हैँ इनके पश्चात क्रमशः ढ़ीमर-केवट , मरार -पटेल से संबंधित जातियों के बाद पांचवे नंबर पर 6.69 % की आबादी के साथ कुर्मी - चंद्रनाहू से संबंधित जातियों को बताया गया है।
गौरतलब हैं कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने राज्य में ओबीसी आरक्षण के प्रतिशत में बढ़ोतरी करने के मकसद से सेवानिवृत्त जिला और सेशन जज छबिलाल पटेल की अध्यक्षता में क्वांटीफायबल आयोग का गठन 11 सितंबर 2019 को कर इस वर्ग में आने वाले जातियों की गणना करवायी थी और इसी रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2019 को ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण प्रतिशत 14 % से 27 % करने का विधेयक विधानसभा में पारित कर मंजूरी के लिए राजभवन को भेजा गया था तब तत्कालीन राज्यपाल अनसुईया उइके ने विधेयक पर हस्ताक्षर करने के पूर्व अध्ययन हेतु क्वांटीफायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट राज्य सरकार से मांगी थी जो कथित रुप से उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया था परिणामस्वरूप विधेयक आज पर्यंत राजभवन में विचाराधीन है। डाटा आयोग की रिपोर्ट आज भी अधिककृत रुप से सार्वजनिक नहीं की गई हैं और इसके पीछे के कारणो का जवाब भी कही से नहीं आया है।
फैक्ट फाईल...
* पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने बनवाई थी रिपोर्ट जिसे सार्वजनिक नहीं की गई।
* आयोग का कार्यकाल 6 माह का था लेकिन आयोग का कार्यकाल 10 बार राज्य सरकार द्वारा बढ़ाया गया।
* 1 करोड़ 7 लाख 6 हजार 856 रुपए खर्च कर आयोग ने ओबीसी वर्ग की जातियों की जनसंख्या रिपोर्ट व प्रतिवेदन राज्य शासन को 21 नवंबर 2022 को सौपी थी।
* छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने लगभग डेढ़ साल तक रिपोर्ट सार्वजनिक न कर गोपनीय रखा।
* राज्य में ओबीसी में शामिल 95 जातियों /उपजातियों की आबादी लगभग सवा करोड़।
* सर्वाधिक 24 % साहू-तेली से जुड़ी जातियों की।
* 18.12 % की आबादी के साथ यादव-राउत समाज ओबीसी में दूसरे नंबर पर।
रायपुर, दुर्ग बिलासपुर में ओबीसी आबादी अधिक...
ओबीसी वर्ग की सबसे अधिक आबादी राज्य के रायपुर जिले में निवास करती है यहाँ इस वर्ग की जनसंख्या 14 लाख 49 हजार है, दुर्ग जिले में 10 लाख 21 हजार, बिलासपुर में 8 लाख 35 हजार, बलौदाबाजार में 6 लाख 72 हजार, बेमेतरा में 6लिख 21 हजार, जांजगीर में 6 लाख 13 हजार, महासमुंद में 5 लाख 89 हजार, राजनांदगांव में 5 लाख 69 हजार, कवर्धा में 5 लाख 38 हजार और रायगढ़ में 5 लाख 34 हजार ओबीसी वर्ग की आबादी हैं।
लीक रिपोर्ट पर आने लगी
प्रतिक्रियांए...
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने के पहले लीक होना मौजूदा भाजपा सरकार की विश्वनीयता पर सवालिया लगता हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। तो वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता केदार गुप्ता ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आरक्षण विरोधी थे, इसलिए सोची समझी रणनीति के तहत् रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया था।
इधर मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के केंद्रीय अध्यक्ष चोवाराम वर्मा ने ओबीसी आबादी में कुर्मी आबादी को पांचवे नंबर पर बताये जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे समाज को कमजोर करने की साजिश बताते हुए क्वांटीफायबल डाटा आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आगामी 24 व 25 फरवरी को धमधा राज के ग्राम हसदा में छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रस्तावित राष्ट्रीय अधिवेशन में डाटा आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जायेगी ।

