सोनपैरी में शिव प्रदोष यज्ञ अनुष्ठान एवं सत्संग समारोह का भव्य शुभारंभ सोनपैरी माता की पूजा-अर्चना, विशाल कलश यात्रा, मानसिक पूजन एवं गुरुपूजन से गूंजा भक्तिमय वातावरण पूज्यपाद डॉ. आनंद मतावले गुरुजी ने पुरुषोत्तम मास, शिव प्रदोष यज्ञ एवं गुरु-भक्ति के महत्व पर दिया प्रेरणादायी आशीर्वचन - chhattisgarhkaratan

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Saturday, 11 July 2026

सोनपैरी में शिव प्रदोष यज्ञ अनुष्ठान एवं सत्संग समारोह का भव्य शुभारंभ सोनपैरी माता की पूजा-अर्चना, विशाल कलश यात्रा, मानसिक पूजन एवं गुरुपूजन से गूंजा भक्तिमय वातावरण पूज्यपाद डॉ. आनंद मतावले गुरुजी ने पुरुषोत्तम मास, शिव प्रदोष यज्ञ एवं गुरु-भक्ति के महत्व पर दिया प्रेरणादायी आशीर्वचन

 सोनपैरी में शिव प्रदोष यज्ञ अनुष्ठान एवं सत्संग समारोह का भव्य शुभारंभ

सोनपैरी माता की पूजा-अर्चना, विशाल कलश यात्रा, मानसिक पूजन एवं गुरुपूजन से गूंजा भक्तिमय वातावरण

पूज्यपाद डॉ. आनंद मतावले गुरुजी ने पुरुषोत्तम मास, शिव प्रदोष यज्ञ एवं गुरु-भक्ति के महत्व पर दिया प्रेरणादायी आशीर्वचन






आज12 जुलाई को रायपुर जिले के ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र ग्राम सोनपैरी (जुलम टेकरी) में आयोजित शिव प्रदोष यज्ञ अनुष्ठान एवं सत्संग समारोह का शुभारंभ रविवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक विधि-विधान के साथ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सोनपैरी माता की विधिवत पूजा-अर्चना से किया गया। इसके पश्चात निकाली गई भव्य एवं विशाल कलश यात्रा ने पूरे ग्राम को शिवमय और भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।

कलश यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं, मातृशक्ति एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर पारंपरिक मंगल गीतों का गायन किया, जबकि श्रद्धालुओं ने "हर-हर महादेव" एवं शिव नाम के जयघोष के साथ पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यात्रा मार्ग में ग्रामवासियों द्वारा पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंग गया।

कार्यक्रम में मानसिक पूजन एवं गुरुपूजन का विशेष आयोजन श्रद्धा और भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इसके उपरांत पूज्यपाद डॉ. आनंद मतावले गुरुजी ने उपस्थित साधक-शिष्यों एवं श्रद्धालुओं को अपने प्रेरणादायी आशीर्वचन प्रदान किए।

अपने उद्बोधन में गुरुजी ने पुरुषोत्तम मास की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह मास आत्मचिंतन, साधना, जप, तप, दान, सेवा और ईश्वर आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी एवं कल्याणकारी माना गया है। इस पवित्र मास में किए गए सत्कर्म अनेक गुना फल प्रदान करते हैं तथा मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

गुरुजी ने कहा कि शिव प्रदोष यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन के शुद्धिकरण, सकारात्मक ऊर्जा के संचार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और लोककल्याण का प्रभावी माध्यम है। यज्ञ की अग्नि में समर्पित आहुति केवल सामग्री की नहीं, बल्कि मनुष्य के अहंकार, द्वेष, क्रोध और नकारात्मक प्रवृत्तियों की भी होनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि गुरु, ईश्वर और सेवा—इन तीनों का समन्वय ही जीवन को सफल एवं सार्थक बनाता है। गुरु का सान्निध्य व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करता है, जबकि सेवा का भाव समाज और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रेम, सद्भाव, सेवा, संस्कार, मानव कल्याण एवं राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

पूज्यपाद गुरुजी ने विशेष रूप से मानव सेवा, रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक संस्कारों के संवर्धन एवं जनकल्याणकारी कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की प्रेरणा देते हुए कहा कि आध्यात्मिकता तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

समारोह में बड़ी संख्या में साधक-शिष्य, श्रद्धालु, ग्रामवासी, मातृशक्ति, युवा एवं दूर-दराज़ क्षेत्रों से आए भक्तजन उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला।

आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी शिव प्रदोष यज्ञ, सत्संग, भजन, प्रवचन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता का आग्रह किया। सोनपैरी की पावन धरा पर प्रारंभ हुआ यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक समरसता एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश प्रदान कर रहा है।

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