आंखों पर पट्टी, फिर भी पढ़ना-लिखना और रंग भरना; बच्चों की प्रतिभा ने सभी को किया आश्चर्यचकित
दि आर्ट ऑफ लिविंग के इनट्यूशन (प्रज्ञा योग) कार्यक्रम में बच्चों ने दिखाई अद्भुत क्षमता, पालकों ने की सराहना
रिपोर्टर थानेश्वर साहू
भखारा:- दि आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के संस्थापक परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर द्वारा डिज़ाइन किए गए इनट्यूशन (प्रज्ञा योग) कार्यक्रम का आयोजन 29 से 31 मई तक भखारा में किया गया। प्रतिदिन दो घंटे संचालित इस विशेष प्रशिक्षण में बच्चों ने आंखों पर पट्टी बांधकर पढ़ना-लिखना, चित्रों में रंग भरना, छिपी हुई वस्तुओं को ढूंढ निकालना जैसी अनेक गतिविधियों का प्रदर्शन कर पालकों एवं उपस्थित लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया।
कार्यक्रम के प्रशिक्षक तामेश्वर साहू एवं गीतालक्ष्मी साहू ने बताया कि इनट्यूशन अर्थात प्रज्ञा योग छठवीं इंद्रिय के जागरण का विज्ञान है। ज्ञान हमें इंद्रियों, बुद्धि और प्रज्ञा से प्राप्त होता है। प्रज्ञा चेतना के स्तर से आने वाला ज्ञान है, जिसके माध्यम से सही समय पर सही विचार प्राप्त होते हैं। इस तकनीक के नियमित अभ्यास से बच्चों की स्मरण शक्ति, निर्णय क्षमता, आत्मविश्वास तथा अध्ययन में रुचि बढ़ती है। साथ ही अनावश्यक भय दूर होता है और बच्चों की छिपी हुई प्रतिभाएं निखरकर सामने आती हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ ही दिनों के अभ्यास से बच्चों के व्यवहार, एकाग्रता एवं आत्मविश्वास में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा किए गए प्रदर्शन ने उपस्थित पालकों को अत्यंत प्रभावित किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में हरख जैन (पप्पू), डॉ. संतोष साहू, हिरेन्द्र साहू एवं बसंत बैस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शांति सेंटर की ब्र.कु. करुणा बहन का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।
पालकों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे प्रशिक्षण अत्यंत उपयोगी हैं तथा अच्छे नागरिक निर्माण में परिवार और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है।
प्रशिक्षकों ने बताया कि प्रज्ञा योग बच्चों के भीतर मौजूद असीम संभावनाओं को जागृत करने का माध्यम है। जब बच्चे अपने अंतर्ज्ञान से जुड़ते हैं तो उनकी एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। यह कार्यक्रम बच्चों को जीवन में सही दिशा और सकारात्मक सोच प्रदान करता है।"
हरख जैन (पप्पू) ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए ऐसे कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। बच्चों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें सही मंच देने का यह एक अनूठा प्रयास है। समाज के सभी पालकों को बच्चों के व्यक्तित्व विकास हेतु ऐसे आयोजनों में सहभागिता करनी चाहिए।
ब्र.कु. करुणा बहन ने अपने संदेश
में कहा कि हर बच्चा अपने भीतर दिव्य शक्तियों और विशेष गुणों का भंडार लेकर आता है। आध्यात्मिकता, ध्यान और सकारात्मक संस्कारों के माध्यम से इन गुणों का विकास किया जा सकता है। बच्चों के उज्ज्वल एवं संस्कारवान भविष्य के लिए ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।


