" राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान को सफल बनाने हुआ विकासखाण्ड स्तरीय प्रशिक्षण"
भारत शासन स्वास्थ्य विभाग के आदेशानुसार शुक्रवार 23
19वर्ष के बच्चों को एक एल्बेंडाजोल का टेबलेट भोजन के बाद चबाकर खिलाने।कृमि संक्रमण के प्रभाव और संचरण चक्र,मानसिक और शारिरिक विकास में बाधा,स्कूलों में नियमित अनुप्थिति,आर्थिक उत्पादकता में कमी, कुपोषण, अनीमिया
आदि रोग से बचाव।कृमि ऐसे परजीवी हैं जो मनुष्य के आंत में रहते हैं और जीवित रहने के लिए पोषण स्तर और जीवन की गुणवत्ता सुधार करने दिया प्रशिक्षित किया गया।परजीवी कृमि मानव शरीर के जरूरी पोषक तत्व को खा जाते हैं जिनसे विभिन्न प्रकार की बीमारी से बच्चे ग्रसित हो जाते है।कृमि संक्रमण बचाव, इलाज और फायदे को भी अपने स्व रचित छत्तीसगढ़ी कविता के माध्यम से विस्तार पूर्वक बताया गया।गम्भीर कृमि संक्रमण के लक्षण, डीएसटी,पेट मे दर्द,कमजोरी उल्टी और भूख न लगना आदि।डीवर्मिंग के फायदे रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार,अनीमिया में नियंत्रण, समुदाय में कृमि व्यापकता में कमी होना,सीखने की क्षमता और परीक्षा फल,उपस्थिति में गुणात्मक सुधार,वयस्यक होने पर काम करने क्षमता और आय में बढ़ोतरी।भूमिका, जिम्मेदारी प्रतिकूल घटना प्रबंधन आदि विषयों पर विस्तार पूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।प्रशिक्षण के उपरांत शिक्षकों से समीक्षात्मक चर्चा कर फीड बेक लिया चर्चा में शिक्षक सघ के संभागीय अध्यक्ष रामनारायण मिश्रा, शिक्षक फेडरेशन के ब्लाक अध्यक्ष यशवंत साहू राज्यपाल शिक्षक सम्मान से पुरस्कृत भागचंद चतुर्वेदी द्वारा भाग लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से चलाए जा रहे राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान सहित बच्चों के पोषण स्वास्थ्य में सुधार के लिए आयरन फोलिक एसिड का टेबलेट माह चार बार खिलाया जा रहा है जो भारत शासन एवं छत्तीसगढ़ सरकार की सराहनीय कदम है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंच पर अतिथि के रूप में विकास खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ वीरेंद्र हिरौदिया, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विकास खण्ड
प्रबंधक सौरभ मेधवानी, प्रधान पाठक गण रामनारायण मिश्रा,यशवंतसाहू,
भागचंद चतुर्वेदी ,नरेश कुमार साहू,श्यामा यादव उपस्थित थे।प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यवस्था बनाने में दुष्यंत वर्मा स्वास्थ्य कर्मचारियों का योगदान रहा। प्रशिक्षण में रामनारायण मिश्रा यशवत साह ,भागचंद चतुर्वेदी, नरेश कुमार साहू,संजय सिन्हा, अरूण कुमार प्रजापति,धुन्ना लाल देवदास,घनश्याम दिवाकर,खेलन साहू ,राजेश साइनिंग,विजय महोबिया,मधेश साहू,तेजकुमार मांडले, जयकुमार नागवंशी, दशरथ डेकर,खेमनसिंह ध्रुव ,रेखा साहू,लक्षमीन साहू,रूचि साहू ,अंजु मार्कण्डेय, सुनीता चतुर्वेदी,विजेता देवानी,बिमलेश निषाद,रेखा साहू, नीता घिदौडे सहित 12 संकुलों के लगभग 150 प्राचार्य, प्रथानपाठक, शिक्षक प्रशिक्षण में उपस्थित रहे।

