धर्म नगरी की जनता धैर्यता के साथ राजिम जिला बनने के इंतजार में
राजिम 2 सितंबर । इन दिनो राजिम को जिला बनाने की मांग लगातार उठ रही है । ऐसा इसलिए कि वास्तव मे राजिम छत्तीसगढ का एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है। जब से छत्तीसगढ बना उसके बाद से ही राजिम ने तेजी से पर्यटन के क्षेत्र में उन्नति की है। राजीवलोचन महोत्सव के बाद राजिम कुंभ कल्प के रूप मे परिवर्तित होते ही देश में पर्यटन के क्षेत्र मे अपना स्थान बनाया है । देश विदेश से हजारों की संख्या में लोग राजिम आने लगे हैं। धीरे-धीरे यह नगर विकास के पथ पर अग्रसर होता गया। फलस्वरूप राजिम को जिला बनाने की जरूरत भी महसूस होने लगी। वर्तमान मे राजिम मेले के दौरान रायपुर, गरियाबंद, धमतरी और महासमुन्द जिले के अधिकारी कर्मचारीगण अपना योगदान दिया करते हैं। जिससे इन जिलों में भी कार्य प्रभावित होते है। जबकि राजिम जिला बन जायेगा तो केवल राजिम के अधिकारी और कर्मचारीगण ही इस राजिम मेले को संचालित करेंगे, फिर राजिम के जिले बनने मे कोई भी कठिनाई नही है। न ही राजनैतिक और न ही भौगोलिक। फिंगेश्वर विकासखंड, नवापारा तहसील और मगरलोड विकासखंड का कुछ हिस्सा शामिल कर राजिम जिले का अस्तित्व बन जायेगा। मगर सबसे आश्चर्यजनक बात है कि इस मुद्दे को लेकर कोई भी राजनैतिक दलो मे कोई विशेष दिलचस्पी नही दिखाई देती । सांसद हो या विधायक या फिर कोई जिम्मेदार जनप्रतिनिधि। इनकी चुप्पी से कई सवाल खड़े हो रहे है। जबकि यह मुद्दा स्थानीय लोग के लिए भावनात्मक रूप से काफी महत्वपूर्ण है और इस राजनैतिक खामोशी से क्षेत्र की जनता में खासी नाराजगी भी देखी जा रही है । लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र की हमेशा से ही राजनेताओं के द्वारा उपेक्षा की जाती जा रही है। अभी भी यह क्षेत्र अपनी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए जूझ रहा है। जैसे बस स्टैंड, सुव्यवस्थित सब्जी मंडी, महिला महाविद्यालय, व्यवसायिक पाठ्यक्रम आदि। इस सबके बावजूद राजिम अपनी विकास यात्रा में नित्य नये सोपान बना रहा है। नवापारा और राजिम प्रदेश की एक पहचान है। यह प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक नगर है। जानकारी के मुताबिक यहाँ की नैरोगेज रेलमार्ग का भी ब्रॉडगेज मे उन्नयन होना है। जिससे निश्चित ही राजिम का विकास और तेजी से होगा। इन सबके बावजूद अगर राजिम जिला नहीं बनता है तो यह राजिम के अधिकार का हनन है। अब लगता है कि प्रशासन को किसी बड़े आन्दोलन का इंतजार है। शायद तभी प्रशासन की कुंभकर्णी नींद से आंख खुलेगी । राजिम की जनता जिस धैर्य का परिचय दे रही है।वह प्रशंसनीय है। शासन को राजिम क्षेत्र की जनता की भावना की कद्र करते हुए राजिम को जिला बनाने की मांग को शीघ्र पूरा करने चाहिए।
1994 से हो रही राजिम जिला की मांग
जानकारी के मुताबिक अविभाजित मध्यप्रदेश में जब दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब संत कवि पवन दीवान जोर शोर से राजिम को जिला बनाने की मांग रखी थी उसके बाद छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही सन् 2002-03 में मुख्यमंत्री एक दिवसीय प्रवास के दौरान नवापारा राजिम पहुंचे थे तब मंच से ही राजिम नवापारा दोनों को मिलाकर जिला बनाने की मांग उठी थी। मुख्यमंत्री अजीत जोगी तैयार हो गए थे लेकिन किसी बात पर सहमति न बन पाई जिसके कारण मामला यहीं पर अटक गया और अजीत जोगी ने कहा कि हम इसे पर्यटन जिला घोषित करेंगे इस पर पवन दीवान का साफ कहना था कि दुनिया में कहीं भी पर्यटन जिला नहीं है इसे राजस्व जिला बनाया जाए। उसके बाद से लगातार राजिम को जिला बनाने की मांग उठ रही है लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुआ है। यह भी जानना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ राज्य बने तब मात्र 16 जिला थे अब 16 जिला और बन चुके हैं परंतु अभी भी राजिम का क्रम नहीं आया है जो चिंता का विषय बन चुका है।
जिला बनने के लिए दूरी कितनी होनी चाहिए
बताया जाता है कि जिला बनने के लिए कम से कम उस जिला मुख्यालय से जो नया जिला बनेंगे उनकी दूरी 35 किलोमीटर या फिर उससे अधिक होनी चाहिए। वैसे भी राजिम से गरियाबंद जिला मुख्यालय की दूरी 44 किलोमीटर है तथा इधर राजधानी रायपुर की दूरी 45 किलोमीटर है। जिला मुख्यालय महासमुंद की दूरी भी 44 किलोमीटर है तथा धमतरी जिला मुख्यालय की दूरी लगभग 65 किलोमीटर है। इस तरह से दुरिया भी अधिक है।
जिला बनाने के लिए अभी तक मात्र नगर पंचायत से गया है प्रस्ताव
राजिम को जिला बनाने के लिए अभी तक प्रशासनिक कार्यवाही कुछ नहीं दिख रही है हां यह बात जरूर है की नगर पंचायत राजिम ने बैठक में राजिम को जिला बनाने की प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर प्रशासन को भेज दिए हैं। इस दिशा में प्रशासनिक कार्यवाही कहीं नहीं दिख रही है। लोग उम्मीद लगा कर बैठे हुए हैं कि शीघ्र राजिम जिला बनेंगे।
जिले की मांग कैसे होगी पूरी
विधानसभा के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की इस दिशा में अभी तक कोई बयान नहीं आया है। कहना होगा कि राजिम का विधायक पूरे राजिम विधानसभा को अपना परिवार मानते हैं। लोगों को चिंता हो रही है कि परिवार के मुखिया परिवार के लोगों की चिंता क्यों नहीं कर रहे हैं। हो सकता है वह इनकी मांग गोपनीय रूप से मुख्यमंत्री से कर चुके होंगे और सीधे जिला बना कर ही दम लेंगे खैर यह सब बातें समय की गर्त पर छिपी हुई है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, किसान, व्यापारी, विद्यार्थी सभी लोग राजिम को शीघ्र जिला बनाने की मांग शांतिपूर्ण ढंग से कर रहे हैं और इन्हें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ऊपर पूरा विश्वास है कि वह राजिम को अवश्य जिला बनाएंगे इंतजार है वह शुभ दिन कब आएगा।
