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Wednesday, 10 February 2021

केन्द्र सरकार के द्वारा पारित कृषि बिल के विरोध में कांग्रेस का प्रेसवार्ता का आयोजन पेंशन भवन नगर पंचायत मगरलोड में संपन्न

 





पत्रकार कैलाश टांडे

छत्तीसगढ़ का रत्न

धमतरी मगरलोड ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा केंद्रीय कृषि कानून के विरोध मे मगरलोड ब्लॉक प्रेस वार्ता सिहावा विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक डॉक्टर लक्ष्मी ध्रुव धमतरी से आए प्रभारी प्रवीण द्रोजी ने किया गया एवम् केन्द्र सरकार से कानून को वापस लेने की मांग की गई,साथ ही किसान आंदोलन में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजली अर्पित की गई , कांग्रेस के कार्यक्रम पहुंचे जनपद पंचायत मगरलोड अध्यक्ष ज्योति दिवाकर ठाकुर उपाध्यक्ष राजेश साहू जी जनपद पंचायत मगरलोड नगर पंचायत अध्यक्ष नीतू खिलावन साहू जिला पंचायत सदस्य सुश्री कांति कंवर जी जिला पंचायत सदस्य श्री साहू जी ङीहु  राम साहू जी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मगरलोड विधायक प्रतिनिधि  सुरेंद्र धनंजय  रवि निर्माण  वरिष्ठ कांग्रेस नेता  चंदन बाफना पप्पू देवांगन वरिष्ठ कांग्रेस नेता  लीला राम साहू वरिष्ठ नेता देवांगन जी वरिष्ठ कांग्रेस ङकवर साहू युवक नगर अध्यक्ष  दिलीप सोनी जिन्होंने प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून पूरी तरह से किसानों को बर्बाद करने वाला कानून है , जिसे तत्काल बिना शर्त केन्द्र सरकार को वापस लेना चाहिए , वहीं राज्य सरकार द्धारा लगातार किसानों के हित में कार्य करने का उल्लेख की , वही पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि छतीसगढ़ राज्य सरकार अपने समस्त चुनावी वादों को पूरा करेगी।

 भी केन्द्र सरकार को घेरा,उन्होेंने पर सरकार कि मंशा साफ करने को कहा,साथ ही तीनों कानून को तत्काल वापस लेने कि मांग की।

ब्लाॅक  अध्यक्ष  ङीहु राम साहू ने कहा कि केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये तीनों कानून,काले कानून हैं,हम इस कानून का विरोध करते हैं,कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर संसद तक इसके लिये लड़ाई लड़ रही हैं। तीन काले कानून क्या है

पंजाब हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश समेत देश के कई और हिस्सों से आए किसान किसी से जुड़े तीन कानून को लेकर दिल्ली की यूपी हरियाणा से लगती सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं

1 कृषि उपज व व्यापार और वाणीज समर्थक और सरलीकर विधेयक 2020 इस कानून में एक ऐसा इको सिस्टम बनाने का प्रावधान ह जहां किसान और व्यापारियों को राज्य की एपीएमसी एग्रीकल्चर पोङशूस मार्केट कमेटी की रजिस्ट्रङ मंडियों से बाहर फसल बेचने की आजादी होगी इसमें किसानों की फसल को एक राज्य से दूसरे राज्य मैं बिना किसी रोक-टोक के बेचने को बढ़ावा दिया गया है बिल में मार्केटिंग और ट्रांसपोर्टर पर खर्च कम करने की बात कही है ताकि किसान को अच्छा दाम मिल सके इसमें इलेक्ट्रॉनिक व्यापार के लिए एक सुविधाजनक ढांचा मुहिम करने की बात कही गई विपक्ष की तरफ से राज्य को राजस्व का नुकसान होगा क्योंकि अगर किसान एपीएमसी मंडियों के बाहर फसल बेचेंगे तो वही मंडी फिर नहीं वसूल पाएंगे कृषक व्यापारअगर मंडियों के बाहर चले गए तो कमीशन एजेंटों का क्या होगा इसके बाद धीरे-धीरे एमएसपी न्यूनतम समर्थन मूल्य के जरिए फसल खरीदी बंद कर दी जाएगी मंडियों में व्यापार बंद होने के बाद ढांचे के तरह बनी की नेमी जैसी इलेक्ट्रिक व्यापार प्रणाली का आखिरी क्या होगा किसान

2 इस कानून में कृषि करारो कोटै टैक्स फ्रेमग को उल्लेखित किया गयाा है इसमें एक राष्ट्रीय फ्रेमवर्क बनाने का प्रधान किया गया है इस कानून केे तहत किसान कृषि व्यापार करने वाली फमै प्रोसेस ठोक व्यापारी नीति को या बड़े खुदगर्ज विक्रेताओं के साथ कांटेक्ट करके पहले से तय एक दाम पर भविष्य में अपनी फसल बेच सकता है 5 हेक्टर से कम जमीन वाले छोटे किसान कॉन्ट्रैक्ट से लाभ कम पाएंगे बाजार की अनिश्चित के खतरेेे को किसान की जगह कांटेक्ट फ्रेमिंग करने वाले प्रायोजक को पर डाला गयाा है अनुबंधित किसान को गुणवत्ताा वाले बीीज की आपूर्ति सुनिश्चित करने की सहायता और फसल स्वास्थ्य की  निगरानी ऋण की सुविधा और फसल बीमा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी इसके तहत किसान मध्यस्थ को दरकिनार कर पुरे दाम के लिए सीधे बाजार में जा सकता है किसी विवाद की सूरत में एक तय समय पर एक तंत्र को स्थापित करने की बात कही गई विपक्ष की तर्क कांट्रेक्टर फ्रेमिंग के द्वारा किसान संयोजक से खरीद फरोख्त पर चर्चा करने मामले में कमजोर होने छोटे किसान भीड़ होने से शायद पर योजक उनसे सौदा करने पसंद ना करें किसी विवाद की स्थिति में एक बड़ी निजी कंपनी थोक व्यापारी प्रोफेसर जो प्रयोजन हो उसे बढ़ता होगा

3 आवश्यक वस्तु संशोधित विधेयक  2020

इस कानून में अनाज दलहन तिलहन खाद्य तेल पर प्याज आलू जी आवश्यक वस्तु की सूची में हटाने का प्रावधान हैं के अर्थ यह हुआ कि युद्ध जैसी स्थिति असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर अब जितने चाहे इनका भंडारण किया जा सकता है इस कानून से निजी सेक्टर का कृषिक क्षेत्र में डर काम होगा क्योंकि अब तक आधुनिक कानूनी हस्तक्षेप के कारण निजी निवेश आने से डरता थे बड़ी कंपनियों को किसी फसलों को अधिक भंडारण करने की क्षमता होगी इससे अर्थ क्या हुआ है फिर वह कंपनी किसानों को दाम तय करने पर मजबूर करेंगे किसान संगठन का आरोप है कि नया कानून की वजह से कृषि क्षेत्र में पूंजी पतियों का कारपोरेट   घटनाओं के हाथों में चले जाएंगे और चीन का नुकसान किसानों को होगा

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