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Wednesday, 16 December 2020

मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना से 105 कुपोषित बच्चों की सेहत में सुधार लाने का होगा प्रयास


 मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना से 105 कुपोषित बच्चों की सेहत में सुधार लाने का होगा प्रयास 

दुर्ग, 14दिसंबर 2020। एकीकृत बाल विकास परियोजना दुर्ग (ग्रामीण) के सेक्टर रसमड़ा के अंतर्गत गंभीर कुपोषित और संकटग्रस्त बच्चों के सेहत में सुधार के लिए मुख्यमंत्री बाल संदर्भ शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रसमड़ा के डॉ. तारेंद्र देशमुख द्वारा 0 से 5 साल तक उम्र के आंगनबाड़ी में पंजीकृत बच्चों के स्वास्थ्य जांच करते हुए उम्र के अनुसार ऊंचाई व वजन की माप की । इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों में चिंहाकित गंभीर कुपोषित व कुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। नवम्बर और दिसंबर माह में आयोजित शिविरों में आंगनबाड़ी केंद्रों मेंबच्चों की स्वास्थ्य जांच कोविड-19 के नियम का पालन करते हुए की गयी है। वहीं इस वर्ष नवंबर-2020 में विभागीय रिपोर्ट के अनुसार 105 बच्चों की सेहत में सुधार लाने के लिए चिंहाकित किए गए हैं।  

महिला पर्यवेक्षक शशी रैदास ने बताया, “पिछले वर्ष नवंबर-2019 में बाल संदर्भ योजना के तहत रसमड़ा सेक्टर के 24 आंगनबाड़ी केंद्रों में 190 कुपोषित बच्चों को चिंहाकित किया गया था जिसमें से 70 बच्चे अब सामान्य स्तर पर आ गए हैं। पर्यवेक्षक ने बताया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सतत प्रयासों से इस वर्ष 120 बच्चे चिन्हांकित किए गए हैं जिसमें 15 सामान्य, 88 कुपोषित एवं 17 बच्चे गंभीर कुपोषित की श्रेणी में रखे गए हैं। बच्चे के माता-पिता को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से नियमित खानपान का सही तरीका बताया गया। जिससे 15बच्चों के वजन में वृद्धि हुयी है जिस कारण उनके स्वास्थ्य में सुधार आया है और वे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं। 

डॉ. तारेंद्र देशमुख ने स्वास्थ्य जांच के बाद गंभीर कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल रेफर किया । शिविर में सेक्टर रसमड़ा के अंतर्गत गनियारी, खपरी, कोटनी, मोहलाई, पीपरछेड़ी, महमरा, दमोदा, खुरसुल सहित 9 ग्राम पंचायत के कुपोषित बच्चों को फल वितरण किया गया। बच्चों के पालकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन निश्चित व निर्धारित मात्रा में घर में ही तैयार भोजन को दिन में कम से कम 6 से 7 बार खिलाने को सलाह दी गई। 

परियोजना अधिकारी अजय कुमार साहू ने बताया,“कुपोषित बच्चों कोआंगनबाड़ी केंद्रों में गर्मभोजन, सूखा राशन, और नियमित गृहभेंट के दौरान उनके  स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा रहा है।साथ ही रेडी-टू-ईट पैकेट को छः भागों में बांटकर प्रतिदिन कितना हिस्सा खाया जाना है इसके संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाती है। शिविर में साफ-सफाई व स्वच्छता के संबंध में जानकारी दी गई। ऐसे बच्चे जिनका वजन लगातार तीन-चार माह से नहीं बढ रहा है ऐसे बच्चों का चिंहांकन कर मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना में दवाइयां उपलब्ध कराकर उनका वजन कर उनकी निगरानी की जा रही है। इसके अलावा कोरोना वायरस और मौसमी बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए बच्चों को बिमार होने से बचाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।“

योगिता और डूमेंद्र को मिला बाल संदर्भ योजना का सहारा-

प्रदेश के बच्चों के स्वास्थ्य संबंधित देखरेख और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संचालित गतिविधियों का लाभ गांव के जरुरतमंदों को मिल रहा है। जिले के कोटनी आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-02की कार्यकर्ता रत्नी ठाकुर ने एक हितग्राही बच्ची योगिता जिसकी उम्र 49 माह थी उसका अगस्त माह में 12.0 किग्रा वजन था। और पिछले 3 माह से लगातार वजन में कमी आ  रही थी। वजन चार्ट के अनुसार सामान्य स्तर में आने के लिए 600 ग्राम की कमी हो गईथी। फिर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रत्नी ठाकुर द्वारा लगातार गृहभेंट के माध्यम से घर का पका गर्मभोजन, रेडी टू ईट को अपने सामने खिलाने लगी । इस तरह लगातार निगरानी करने की वजह से दिसंबर माह में अब योगिता का वजन बढकर 12.990 किग्रा सामान्य स्तर हो गया है। 

आंगनबाड़ी केंद्र ग्राम पीपरछेड़ी में27 माह के डुमेंद्र कुमार का वजन अगस्त माह में 9.300 किग्रा था, जो सामान्य स्तर में आने के लिए 800 ग्राम कम था।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उत्तमकुंवर के लगातार देखभाल और गृहभेंट से डुमेंद्र की सेहत पर मां भी ध्यान देने लगी। अब घर का पका गर्मभोजन के साथ रेडी टू ईट का उपयोग और हर 2 घंटे में थोड़ा-थोड़ा पोषण आहार भी खिलाते रहने की सलाह दी गई। नवम्बर माह में डूमेंद्र का वजन सामान्य स्तर का 10.75 किग्रा हो गया। 

                                                        

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