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Wednesday, 25 November 2020

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के मेहनत से निहारिका के जीवन में आयी बदलाव


 राज्य शासन के योजनाओं से जिले के महिलाओं एवं कुपोषित बच्चों के लिए कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। कुपोषित बच्चों की प्रतिदिन आंगनबाड़ी केन्द्रों में पौष्टिक आहार जैसे-रेडी टू ईट, दाल, अंडा, हरी सब्जी, अंडा नहीं खाने वाले बच्चों को मूंगफली गुड़ से बनी चिक्की और गरम भोजन दिया जा रहा है। एकीकृत बाल विकास परियोजना कांकेर के पर्यवेक्षक श्रीमती ललति जैन ने बताया कि सेक्टर माकड़ीखुना ग्राम पंचायत बागोडार के अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्र बागोडार-3 में दर्ज हितग्राही गर्भवती माता चैतीबाई मण्डावी के घर 24 दिसम्बर 2018 को बालिका निहारिका का जन्म हुआ। जन्म के समय बच्चे का वजन 2.5 किलोग्राम था, जन्म के पश्चात उसकी मॉ चैतीबाई का दिमागी हालत ठीक नहीं होने के कारण वह बच्चे को अपनी दूध नहीं पिलाती थी, न ही बच्चे को अपने पास रखती थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती प्रमिला साहू के सहयोग से बच्ची को घर में उसके पिता एवं उसकी बड़ी बहन देखरेख करती थी, जिसे मॉं का दूध नहीं मिलने के कारण बच्ची गंभीर कुपोषित की श्रेणी में आ गई। निहारिका को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानीन, पर्यवेक्षक, स्वस्थ्य कार्यकर्ता द्वारा लगातार गृह भेंटकर उम्र आधारित पावडर दूध पिलाने की सलाह दी गई। निहारिका के छः माह पूर्ण हो जाने पर आंगनबाड़ी केन्द्र में अन्नप्राशन कराया गया एवं कार्यकर्ता द्वारा प्रतिदिन बालिका को आंगनबाड़ी केन्द्र में लाकर गरम भोजन खिलाया जाता था। आंगनबाड़ी निरीक्षण के दौरान पर्यवेक्षक द्वारा गृहभेंट के माध्यम से ऊपरी आहार में गुणवत्ता एवं रेडी टू ईट प्रतिदिन खिलाने की सलाह दी गई, साथ ही परिवार के व्यवहार में भी बदलाव आया, जिसके कारण मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान (कांकेर किलकारी) योजना के माध्यम से बालिका निहारिका को प्रतिदिन आंगनबाड़ी में पौष्टिक भोजन खिलाने से उनके स्वास्थ्य में सुधार आयी, इस प्रकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मेहनत से निहारिका को स्वस्थ बनाने में वरदान साबित हुआ। 

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