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Tuesday, 3 November 2020

जिसमें 26500 हेक्टेयर ग्रीष्मकालीन धान में पानी देने का निर्णय लिया गया है। यदि बांध से नदी में पानी छोड़ा जाता है तो ग्रीष्मकालीन


 पूर्ण जल भराव स्तर के नीचे अनधिकृत रूप से ली गई फसल के लिए शासन जिम्मेदार नहीं: कार्यपालन अभियंता

धमतरी 03 नवम्बर 2020/ कार्यपालन अभियंता जल प्रबंध संभाग रूद्री कोड क्रमांक-38 श्री यू.डी. रामटेककर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि जल संसाधन विभाग द्वारा पूर्ण जल भराव स्तर से ऊपर की खाली जमीन एक वर्ष के लिए लीज पर दी जाती है। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि जलाशय का जल स्तर कम या ज्यादा होने से यदि ली गई भूमि से फसल को किसी प्रकार का नुकसान होता है तो शासन की कोई जवाबदारी नहीं होगी तथा इसके एवज में किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा, इस शर्त के साथ भूमि लीज पर दी जाती है। किन्तु कतिपय लोगों के द्वारा चेतावनी का उल्लंघन करते हुए प्रतिवर्ष अनधिकृत रूप से अतिक्रमण कर पूर्ण जल भराव स्तर (एफआरएल) के नीचे की जमीन पर फसल ली जाती है। कार्यपालन अभियंता ने बताया कि इस साल गंगरेल जलाशय का जल स्तर पूर्णरूप से भर गया है, इस कारण अनधिकृत रूप से ली गई फसलें प्रभावित हुई हैं। उन्होंने बताया कि चेतावनी के बाद भी जमीन पर फसल लगाने के कारण फसलों के नुकसान के लिए विभाग उत्तरदायी नहीं है। साथ यह भी बताया गया कि जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक सात अक्टूबर को आयोजित की गई थी, जिसमें 26500 हेक्टेयर ग्रीष्मकालीन धान में पानी देने का निर्णय लिया गया है। यदि बांध से नदी में पानी छोड़ा जाता है तो ग्रीष्मकालीन धान लगाने वाले हकदार किसानों को नुकसान होगा। वर्तमान में 500 क्यूसेक पानी विद्युत उत्पादन कर नदी में एवं रायपुर नगर निगम के लिए दिया जा रहा है जिससे धीरे-धीरे जल स्तर घटता जा रहा है।

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