आत्मविश्वास से लबरेज महिलाएं हुईं आत्मनिर्भर
धमतरी, 06 मार्च 2020/ सुराजी गांव योजना से जुड़कर समूह की महिलाएं भी अपनी आमदनी में इजाफा कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। वे न सिर्फ अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं बल्कि जीवन यापन का उन्हें एक नवीन व सशक्त जरिया भी मिला। जिला मुख्यालय से लगी ग्राम पंचायत पोटियाडीह के जय शाकम्भरी महिला स्वसहायता समूह की नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी परियोजना के तहत समूह की 13 महिलाएं सब्जी उत्पादन करने के साथ-साथ बाजार में उनका विक्रय भी कर रही हैं, जिससे उनकी आय और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है।ग्राम पोटियाडीह के जय शाकम्भरी महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती हेमलता पटेल ने बताया कि समूह द्वारा शासकीय जमीन के आधे एकड़ में सब्जीवर्गीय फसलें जैविक पद्धति से ली जा रही है, जिसमें सब्जी, भाजी सहित विभिन्न प्रकार की नकदी फसलें उत्पादित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि समूह के द्वारा भिण्डी लौकी, बैंगन, प्याज भाजी, धनिया, पालक, टमाटर, लाल भाजी, मेथी, धनिया, चेंच भाजी, चैलाई भाजी, जरी, कांदा भाजी, करमत्ता भाजी, अमारी भाजी आदि का उत्पादन लिया जा रहा है, जिसमें समूह की सभी 13 महिलाओं को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन सब्जियों को बाड़ी से निकालकर स्थानीय बाजार में 40 रूपए प्रति किलो के मान से बेचा जाता है। चूंकि सभी उत्पाद जैविक पद्धति से तैयार किए गए हैं, इसलिए ये हाथोहाथ बिक जाते हैं। समूह की सचिव श्रीमती प्रमिला पटेल ने बताया कि कुछ ही महीने के भीतर समूह को सब्जी उत्पादन और विक्रय से अब तक 20 हजार से अधिक रूपए का मुनाफा हो चुका है। समूह की सफलता को देखते हुए कतिपय अन्य समूहों ने भी सब्जी उत्पादन की मंशा जाहिर की है। उन्होंने बताया कि जैविक विधि से उत्पादित सब्जियों के प्रति लोगों का रूझान बढ़ता ही जा रहा है, इससे भविष्य में सब्जियों के रकबे में वृद्धि करने की भी योजना समूह द्वारा बनाई जा रही है। इस प्रकार प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजनांतर्गत नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी से न सिर्फ ग्रामीणों में आत्मनिर्भरता आई है, बल्कि बहुद्देशीय लक्ष्यों की भी आसानी से पूर्ति हो रही है। श्रीमती पटेल ने बताया कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में तकनीकी सलाह से सब्जियों का बेहतर उत्पादन हो रहा है।