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Monday, 6 July 2026

छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर थीं पंडवानी गायिका तीजन बाई, उन्होंने पुरुष प्रधान समाज में महिला सशक्तिकरण की नई पहचान दी : रंजना साहू

 छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर थीं पंडवानी गायिका तीजन बाई, उन्होंने पुरुष प्रधान समाज में महिला सशक्तिकरण की नई पहचान दी : रंजना साहू




छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को अपनी सशक्त आवाज़ और अद्वितीय प्रस्तुति के माध्यम से विश्व पटल पर स्थापित करने वाली पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती रंजना साहू ने गहरा शोक व्यक्त किए


धमतरी- छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को अपनी सशक्त आवाज़ और अद्वितीय प्रस्तुति के माध्यम से विश्व पटल पर स्थापित करने वाली पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं धमतरी की पूर्व विधायक श्रीमती रंजना डीपेंद्र साहू ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है, तीजन बाई छत्तीसगढ़ की ऐसी अमूल्य धरोहर थीं जिन्होंने पुरुष प्रधान समाज में अपनी अद्भुत प्रतिभा, आत्मविश्वास और संघर्ष के बल पर महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम की, उन्होंने पंडवानी जैसी लोककला को केवल जीवित ही नहीं रखा, बल्कि उसे विश्वभर में नई पहचान दिलाई। उनकी कला, समर्पण और व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे, तीजन बाई ने तंबूरे के साथ महाभारत की कथाओं का ऐसा जीवंत गायन किया कि श्रोता घंटों तक मंत्रमुग्ध होकर उनकी प्रस्तुति सुनते रहते थे, उनकी वाणी में लोकजीवन की सहजता, संस्कृति की गहराई और भारतीय परंपरा की आत्मा समाहित थी। उन्होंने देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का परचम लहराया तथा विश्व समुदाय को भारतीय लोककला की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया।रंजना साहू ने कहा कि भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जाना उनके अद्वितीय योगदान का प्रमाण है। अमेरिका, फ्रांस, जापान सहित अनेक देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।उन्होंने कहा कि तीजन बाई केवल एक महान लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की संस्कृति, स्वाभिमान और नारी शक्ति की सशक्त प्रतीक थीं। उन्होंने अपने संघर्ष, साधना और अथक परिश्रम से यह सिद्ध किया कि प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। उनकी जीवन यात्रा प्रत्येक बेटी और कलाकार के लिए प्रेरणा का स्रोत है। श्रीमती रंजना साहू ने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिवार, शुभचिंतकों और कला प्रेमियों को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि तीजन बाई की मधुर आवाज़, उनकी कला और उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत सदैव देशवासियों के हृदयों में जीवित रहेगी।

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