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Tuesday, 14 July 2026

शिव प्रदोष यज्ञ के द्वितीय दिवस उमड़ा आस्था का सैलाब, 22 श्रद्धालुओं ने किया रक्तदान"

 "शिव प्रदोष यज्ञ के द्वितीय दिवस उमड़ा आस्था का सैलाब, 22 श्रद्धालुओं ने किया रक्तदान"



सोनपैरी (अभनपुर)। रायपुर जिले के ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र ग्राम सोनपैरी (जुलम टेकरी) में आयोजित शिव प्रदोष यज्ञ अनुष्ठान एवं सत्संग समारोह के द्वितीय दिवस आध्यात्मिक साधना, वैदिक संस्कृति और मानव सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। पूज्यपाद डॉ. आनंद मतावले गुरुजी ने शिव प्रदोष यज्ञ के आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर विस्तृत प्रवचन देते हुए कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के कल्याण का दिव्य माध्यम है।

गुरुजी ने कहा कि देवताओं का स्वरूप त्रिआयामी एवं सूक्ष्म है। उन्हें न तो सामान्य नेत्रों से देखा जा सकता है और न ही प्रत्यक्ष रूप से भोजन कराया जा सकता है। वैदिक परंपरा में अग्निकुंड में मंत्रोच्चार के साथ दी गई आहुतियां सूक्ष्म रूप में देवशक्तियों तक पहुंचती हैं। यही यज्ञ की वास्तविक शक्ति और सनातन संस्कृति का वैज्ञानिक आधार है। उन्होंने कहा कि यज्ञ मनुष्य के भीतर के अहंकार, क्रोध, द्वेष और नकारात्मक प्रवृत्तियों का दहन कर जीवन में शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

प्रवचन के दौरान गुरुजी ने पुरुषोत्तम मास की महिमा बताते हुए साधना, जप, तप, दान, सेवा और गुरु-भक्ति को जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता तभी सार्थक है, जब वह मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण और समाज कल्याण से जुड़कर जनहित का माध्यम बने।

समारोह में श्रद्धालुओं को मंत्रदीक्षा प्रदान की गई तथा विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्ण श्रद्धा के साथ पूर्णाहुति सम्पन्न हुई। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भोग-भंडारे की व्यवस्था भी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

समारोह के दौरान आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में 22 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर मानव सेवा का अनुकरणीय संदेश दिया। गुरुजी ने रक्तदान को महादान बताते हुए कहा कि किसी जरूरतमंद के जीवन की रक्षा से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। श्रद्धालुओं ने धार्मिक आस्था के साथ सेवा का यह संकल्प लेकर शिव प्रदोष यज्ञ के उद्देश्य को और अधिक सार्थक बनाया।

उल्लेखनीय है कि समारोह का शुभारंभ प्रथम दिवस सोनपैरी माता की पूजा-अर्चना, विशाल कलश यात्रा, मानसिक पूजन एवं गुरुपूजन के साथ हुआ था। पूरे आयोजन में दूर-दराज़ से आए हजारों श्रद्धालुओं, साधक-शिष्यों, मातृशक्ति एवं युवाओं की सहभागिता से वातावरण शिवमय बना रहा। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी धार्मिक कार्यक्रमों में अधिकाधिक सहभागिता की अपील की।

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