सतनामी समाज के गौरव नरसिंह मंडल : संघर्ष, सेवा और सिद्धांतों की प्रेरक गाथा
7 जून जयंती विशेष
छत्तीसगढ़ की सामाजिक और राजनीतिक चेतना के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका जीवन स्वयं एक प्रेरणादायी ग्रंथ बन जाता है। स्वर्गीय नरसिंह मंडल ऐसे ही विलक्षण व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अभावों, संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों को अपनी शक्ति बनाकर समाज सेवा, संगठन और जनकल्याण के क्षेत्र में अमिट पहचान स्थापित की। उनकी जयंती 7 जून के अवसर पर उन्हें स्मरण करना एक ऐसे कर्मयोगी को नमन करना है, जिसने जीवनभर सिद्धांतों से समझौता किए बिना समाज और मानवता की सेवा की।
संघर्षों की भट्ठी में तपकर बने व्यक्तित्व
नरसिंह मंडल का जीवन इस बात का प्रमाण है कि महान व्यक्तित्व सुविधाओं से नहीं, बल्कि संघर्षों से निर्मित होते हैं। उनके पिता स्वर्गीय आसकरण मंडल आजीविका की तलाश में भीषण अकाल के दौर में अपने मूल गांव थूहा से जमशेदपुर (टाटानगर) पहुंचे थे। वहीं 8 जुलाई 1940 को नरसिंह मंडल का जन्म हुआ।
बाल्यकाल में ही पिता का साया उठ गया। इसके बाद मां सुंदरी बाई और बड़े भाई रघुनाथ मंडल ने उनका पालन-पोषण किया, लेकिन नियति ने उन्हें यहां भी नहीं बख्शा। वर्ष 1965 में मां का निधन हो गया और 1970 में बड़े भाई भी संसार छोड़ गए। भाई की सात पुत्रियों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। इन कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से किया। यही कारण रहा कि उन्होंने आजीवन विवाह नहीं किया और अपना जीवन परिवार तथा समाज की सेवा को समर्पित कर दिया।
शिक्षा और सामाजिक जागरण का सफर
कठिन परिस्थितियों के बावजूद नरसिंह मंडल ने अपनी शिक्षा जारी रखी और 1965 में रांची विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद वे रायपुर आए और यहां सामाजिक गतिविधियों से जुड़ गए।
रायपुर के महावीर बाड़ा, गुढ़ियारी छात्रावास में रहते हुए उनका संपर्क समाज के अनेक जागरूक व्यक्तित्वों से हुआ। उनकी कार्यकुशलता और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें छात्रावास का अध्यक्ष बनाया गया। इसी दौरान उन्होंने सतनामी विद्यार्थी परिषद की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसके संस्थापक अध्यक्ष बने।
उन्होंने युवाओं में शिक्षा, संगठन और सामाजिक चेतना का अलख जगाने का कार्य किया। संत गुरु घासीदास जी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज को संगठित करने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
राजनीति में सेवा का आदर्श
नरसिंह मंडल राजनीति को सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा का उपकरण मानते थे। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।
उन्होंने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक पदों पर रहते हुए जनता की सेवा की। वे रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के अध्यक्ष, कांग्रेस ग्रामीण रायपुर के उपाध्यक्ष, हरिजन सेवक संघ के सचिव तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम के सदस्य जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुके थे।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने राजनीति में रहते हुए भी ईमानदारी, सादगी और नैतिक मूल्यों को कभी नहीं छोड़ा। वे उन दुर्लभ नेताओं में थे जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में स्वच्छ छवि बनाए रखी।
रायपुर की पहचान बनी नगर घड़ी
रायपुर शहर की ऐतिहासिक नगर घड़ी (सिटी क्लॉक) को आज राजधानी की पहचान माना जाता है। इस महत्वपूर्ण स्मारक के निर्माण में नरसिंह मंडल की दूरदर्शिता और विकासशील सोच का महत्वपूर्ण योगदान रहा। नगर घड़ी केवल एक संरचना नहीं, बल्कि रायपुर के विकास और आधुनिक सोच का प्रतीक है।
आज भी नगर घड़ी नरसिंह मंडल के विकासवादी दृष्टिकोण और जनहितकारी सोच की जीवंत स्मृति के रूप में खड़ी है।
साहित्य, पत्रकारिता और संस्कृति के संवाहक
नरसिंह मंडल केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। उन्होंने विभिन्न समाचार पत्रों में कार्य किया तथा लंबे समय तक ‘युग पुरुष गुरु घासीदास’ सामाजिक पत्रिका का संपादन किया।
वे गुरुघासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष रहे तथा समाज के इतिहास, संस्कृति और विचारधारा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करते रहे।
समाज के लिए समर्पित जीवन
नरसिंह मंडल का मानना था कि समाज की वास्तविक शक्ति शिक्षा, संगठन और नैतिकता में निहित है। वे गुरु परंपरा के सम्मान और सामाजिक एकता के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने सदैव समाज को राजनीति का मोहरा बनने से बचाने और उसे आत्मनिर्भर एवं जागरूक बनाने की बात कही।
उनकी सादगी, विनम्रता और सेवा भावना के कारण समाज के लोग उन्हें किसी राजमहंत से कम सम्मान नहीं देते थे।
प्रेरणा का अमर स्रोत
आज जब समाज विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब नरसिंह मंडल का जीवन हमें संघर्ष, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक समर्पण का संदेश देता है। उन्होंने सिद्ध किया कि सीमित संसाधनों में भी व्यक्ति अपने संकल्प, मेहनत और ईमानदारी के बल पर समाज में अमिट पहचान बना सकता है।
7 जून की जयंती पर सतनामी समाज के गौरव, समाजसेवी, चिंतक, रायपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष एवं नगर घड़ी के निर्माता स्वर्गीय नरसिंह मंडल जी को विनम्र श्रद्धांजलि। उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।
लेखक : भागचंद चतुर्वेदी
राज्यपाल शिक्षक सम्मान से पुरस्कृत शिक्षक पूर्व सचिव तहसील स्तरीय सतनामी समाज परिक्षेत्र राजिम
