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Saturday, 25 April 2026

सप्त कुण्डीय माँ बगुलामुखी महायज्ञ भव्य रूप से सम्पन्न, गुरुजी डॉ. आनंद मतावले के सानिध्य में सैकड़ों साधकों को मिली मंत्र दीक्षा"

"सप्त कुण्डीय माँ बगुलामुखी महायज्ञ भव्य रूप से सम्पन्न, गुरुजी डॉ. आनंद मतावले के सानिध्य में सैकड़ों साधकों को मिली मंत्र दीक्षा"







ग्राम एम.के. बहरा (भीमखोज-खल्लारी) स्थित श्रीं मातंगी पीठ में बगुलामुखी प्राकट्य दिवस के पावन अवसर पर आयोजित सप्त कुण्डीय माँ बगुलामुखी अखंड (24 घंटे) मंत्र आहुति महायज्ञ का भव्य महापूर्णाहुति कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन गंगा सप्तमी की पूर्व संध्या से प्रारंभ होकर बगुलामुखी जयंती तक निरंतर चला।

इस दिव्य अनुष्ठान का संचालन गुरुसत्ता आध्यात्मिक केंद्र एवं शांति धाम साधक कल्याण वेलफेयर, तरीघाट (राजिम) के संचालक पूज्यपाद गुरुजी डॉ. आनंद मतावले जी के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे आयोजन को विशेष आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।

अपने उद्बोधन में पूज्य गुरुजी डॉ. आनंद मतावले जी ने माँ बगुलामुखी के प्राकट्य और उनकी महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुए बताया कि सौराष्ट्र (गुजरात) में भगवान विष्णु की आराधना से श्रीविद्या त्रिपुरसुंदरी के पीत स्वरूप के रूप में माँ बगुलामुखी का प्राकट्य हुआ था। उस समय प्रकृति में उत्पन्न भीषण असंतुलन—आंधी, तूफान एवं ग्रह-नक्षत्रों की विक्षुब्ध अवस्था—माँ की कृपा से शांत हुई, जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड प्रलय से बच सका।

गुरुजी ने आगे कहा कि माँ बगुलामुखी की साधना से व्यक्ति के भीतर और बाहर व्याप्त भय का नाश होता है तथा वाक् सिद्धि की प्राप्ति होती है। उन्होंने मादन राक्षस का उदाहरण देते हुए बताया कि शक्ति का दुरुपयोग विनाश का कारण बनता है, इसलिए ऐसी उच्च साधनाएं सदैव योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।

महायज्ञ के दौरान गुरुजी ने महाविद्या के विष्णु तत्व, शिव तत्व, भैरव एवं विभिन्न दिव्य शक्तियों के गूढ़ रहस्यों का भी विस्तार से वर्णन किया। महापूर्णाहुति के पश्चात सैकड़ों श्रद्धालु साधकों को विधिवत मंत्र दीक्षा प्रदान की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

कार्यक्रम का समापन आरती एवं समर्पण के साथ हुआ। आयोजन समिति के सभी साधकों को पूज्य गुरुजी ने आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके सेवा भाव की सराहना की।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक जागरूकता और गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को भी सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ। सप्त कुण्डीय मां बंगलामुखी कार्यक्रम का सफल आयोजन सिद्ध मातंगी पीठ मंदिर के संत मनीष बाबा,डॉ गुननिधि पटेल,भेखलाल साहू,नोशन पटेल,प्रेमलाल साहू, यागनिक चंद्राकर सतीश साहू ,युवराज साहू,गुलशन ध्रुव,तीरथ ध्रुव, दुष्यन्त गोलू चंद्राकर कामता चंद्राकर ,पंचराम बारिहा लखन ठाकुर ,मोहन चंद्राकर,आकाश सोनी,लोकेश चंद्राकर,दिग्विजय साहू ,सुमन साहू,दीपक साहू ,प्रणय गुरुवेकर,के सहयोग सफल हुआ।कार्यक्रम में इनकी सहभागिता रही जो छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलो के अलावा उड़ीसा से टिमन पांडे ,राजू चंद्राकर ,गिरीश गजेंद्र,रामधन जोशी ,अमर कश्यप ,दीपक आन्डे ,मोहन मण्डले ,रामग़ुलाल साहू ,पन्ना लाल वशिष्ठ सहित काफ़ी संख्या में साधक शिष्य उपस्थित थे । 

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