छत्तीसगढ़िय कहानी जंगल म एक कोलिह रहय कोलिह बाढ़ चतुर रहय एक दिन वो अपन माडा म बइठे बइठे सोचिए जंगल के चिरई चुरगुन अउ छोटे बड़े चश्मा जानवर बिसाही बङ कमइ होही
दूसर दिन वो शहर जाके रकम रकम के चश्मा आनिस अउ बीच जंगल म मउहा तरी खोल ङारिस चश्मा के दुकानजंगल के चिरई चुरगुन अउ छोटे बड़े चश्मा जानवर बिसाही बर दुकान म आय लागिन कोलिह के दुकान म भीङ लगगे बेदरा ल क्रिया रग के
चश्मा पसंद आइस भालू ल सफेद चश्मा पसंद आइस अऊ हइराना ल लाल खरगोश के पसंद सबले निराला राहय