बाधाओं से कैसा घबराना
जरा जरा सी बात पर
क्यों रोता है इंसान
हर इच्छा इंसान की
पूरी कभी न होय।
हानि लाभ जीवन मरण
यश अपयश विधि हाथ
घटता है,कुछ न कुछ हादसा
हर व्यक्ति के साथ
बाधाओं से घबराने के बजाय
दृढ़ता से करें,उनका मुकाबला
बाधाओं से कैसा घबराना।
स्वयं को पानी की भांति समझें
पानी का धर्म है बहना
बहता हुआ पानी,तरोताजा रहता है
वही रुका हुआ पानी तो
सड़ भी जाता है
बाधाओं से घबराकर,रुके नही
बहते रहें,आगे बढ़ते रहे
क्योंकि इससे हौसला,बढ़ता है
और बाधाएं टूटती है।
व्यक्ति का हक इस संसार में
कोई छीन न पाया है
चाहे दुश्मन उम्र भर
करता रहें,कोई उपाय
जरा जरा सी बात पर
क्यों रोता है इंसान
बाधाओं से घबराने के बजाय
दृढ़ता से करें, उनका मुकाबला
बाधाओं से कैसा घबराना।
नूतन लाल साहू