दान के परब छेर--छेरा के हमर छत्तीसगढ़ में अब्बड़ महात्म हावय। छेरी क छेरा छेर बरतनिन , छेर छे रा । छेर-- छेरा मई कोठी के धान ला हेर -- हेरा । - chhattisgarhkaratan

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भारत सरकार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मान्यता प्राप्त छत्तीसगढ़ रत्न

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Sunday, 16 January 2022

दान के परब छेर--छेरा के हमर छत्तीसगढ़ में अब्बड़ महात्म हावय। छेरी क छेरा छेर बरतनिन , छेर छे रा । छेर-- छेरा मई कोठी के धान ला हेर -- हेरा ।


 दान के परब छेर--छेरा के हमर छत्तीसगढ़ में अब्बड़ महात्म हावय। 

छेरी क छेरा छेर बरतनिन , छेर छे रा ।

छेर-- छेरा मई कोठी के धान ला हेर -- हेरा ।

धमतरी मगरलोड किसान हा अपन खेत के धान लू मिंज के अपन घर के कोठी मा धरथे ।हमर छत्तीसगढ मे एकठन मान्यता हावय हमर उपजारे अन्न धन मा सबो के हिस्सा होथय ,दान धर्म येकरे से जुड़े हावय ।धान पान लुवाय मिंजा के कोठार ले अपन घर के कोठी मा लान के  साधु - संत , बावा बैरागी  बैरागी ,मगैया -- जचैया मन ला दिहे के ।आजकल हमर छत्तीसगढ के बहुत अकन लोक संस्कृति हा नदवात हावय ।हमर बहुत अकन तीज-- तिहार,दान धरम के पाछु मा विगियान रीहिस दान के साथ मे हमर समाजिक उत्तरदायित्व रीहिस ।समाज में समानता लाए बर अमीरी गरीबी ,छुआछूत ,जातिप्रथा ला मिटाए बर एक परथा। धरम अऊ दान पुन के साथ मे हमर परखा मन जोड़ दिस जेकर महत्तम हा धरम बर दान ले जुड़गे फेर ओकर समाजिक महात्म हा दूध मा पानी ,दिया संग मा अंजोर

हमर पुरखा हा धरम के संग मे पकरिती ला जोड़ के बिगियान ला बताईस वोकरे संग मे समाज के काम ला घलो बता दिन ।


आज हमर नवा पीढ़ी मनला नदावत लोक संस्कृति मनले सहेजे बर पड़ही।खेत ले धान पान ला लुए टोरे के बाद मे गांव के किसान हा बैगा , रखवार,भूतियार ,सोजिया ,नाउ, धोबी ,लोहार ,कोतवाल मन बर ओकर जेवर के  धान ला देथे पहिली के बेरा में किसान हा अपन उपज के हिस्सा मे सब ला बोकर श्रम के अनुसार मदद करे ताकि सबके रोटी ,कपड़ा के जरूरत पूरा हो जाए ।किसान पालन पोषण करय अपन खेत में उपजारे अन्न से ।किसानी काम करे मे इकर सहयोग से होथे येकर सेती सबोला जेवर  देवाय । बैगा गुनिया मन ला गांव के मंदिर देवाला डिही ,डोगरी ,खेत -- खार के देव धामी के पूजा करथे ।   दान के परब छेर--छेरा के हमर छत्तीसगढ़ में अब्बड़ महात्म हावय। 

छेरी क छेरा छेर बरतनिन , छेर छे रा ।

छेर-- छेरा मई कोठी के धान ला हेर -- हेरा ।

किसान हा अपन खेत के धान लू मिंज के अपन घर के कोठी मा धरथे ।हमर छत्तीसगढ मे एकठन मान्यता हावय हमर उपजारे अन्न धन मा सबो के हिस्सा होथय ,दान धर्म येकरे से जुड़े हावय ।धान पान लुवाय मिंजा के कोठार ले अपन घर के कोठी मा लान के  साधु - संत , बावा बैरागी  बैरागी ,मगैया -- जचैया मन ला दिहे के ।आजकल हमर छत्तीसगढ के बहुत अकन लोक संस्कृति हा नदवात हावय ।हमर बहुत अकन तीज-- तिहार,दान धरम के पाछु मा विगियान रीहिस दान के साथ मे हमर समाजिक उत्तरदायित्व रीहिस ।समाज में समानता लाए बर अमीरी गरीबी ,छुआछूत ,जातिप्रथा ला मिटाए बर एक परथा। धरम अऊ दान पुन के साथ मे हमर पुरखा मन जोड़ दिस जेकर महत्तम हा धरम बर दान ले जुड़गे फेर ओकर समाजिक महात्म हा दूध मा पानी ,दिया संग मा अंजोर।

हमर पुरखा हा धरम के संग मे पकरिती ला जोड़ के बिगियान ला बताईस वोकरे संग मे समाज के काम ला घलो बता दिन ।


आज हमर नवा पीढ़ी ला पुरखा के धरम करम संग जुड़े बिगियान अऊ समाजिक महात्म ला बताय बर पडही ।


आज छेर छेरा पुन्नी मे हमर धार्मिक दान के पीछे समाजिक उत्तरदायित्व ला समझे बर पड़ही तभे जे काज बर सियान बर एकर सिरजन करे हावय तेकर सार्थकता हा सही होही ।


आजकल हमर लोक संस्कृति में बहुत हा नादावत हावय हमर लोक संस्कृति ला बहुत झन कलाकार ,साहित्यकार मन बचावत हावय , बचाऐ के उदिम घलो करत हावय ।

किसान मनहा अपन धान पान ला कोठार ले घर लाके सब झन ला ओकर पौनी पसारी देथय-- जेसन की  _राउत, रखवार,बैगा ,लोहार,बनिहार भुतियार,बावा -- बैरागी,मगैया -- जचाईया बर।


ठुन-- ठुनी धरत जाड़ मे बड़े मुंदरहा  मे बसदेवा मन घर के मोहटी मा ..जय गंगान बूढ़ा बैला ला दे दे दान कहत आवय अपन दुःख सुख ला गोटियावाय ।अब वोकर राग डफली के आवाज हा  सुने बर नई मिले।घर -- घर भरतरी गवैया आंखी ले अधियार, पत्नी के कांध मा हाथ ला राखे मगैया नई दिखे । गांव के बीच में अमली के रुख के फूंगी मे चड़ के सबके नाम अऊ बंश के बतैया हरबोलवा नई दिखाय ।का ये सब मनहा रोजी रोटी अऊ पेट बिकाली मे आवत रीहिस ?लोक गीत लोक संस्कृति मनहा समाज के विकास संग मे सिरा जही ?

लोक गीत ,लोक परम्परा के सर्जक मनला का येसेनेच गवा देबो ।


        श्रीमती अनिता गौर

     ग्राम पोस्ट --भोथीडीह

  जिला -- धमतरी (छ. ग.)

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