यहां तैयार की गई इन झांकियों में ब्रह्मकुमारी बहनें 5 देवियों के स्वरूप में नजर आए। जिसमें माता दुर्गा, माता लक्ष्मी, माता कालका, माता सरस्वती और माता ज्ञानगंगा का स्वरूप नजर आया। जिसमें माता दुर्गा शेर पर सवार, तो माता लक्ष्मी कमल पर तो माता सरस्वती सफेद हंस पर तो माता कालका खड़े स्वरूप में वहीं माता ज्ञानगंगा, ज्ञान की गंगा बहाते हुए नजर आती हैं। मेडिटेशन का हमारी बहनें अभ्यास करती है। उसी प्रतीकात्मक रूप में वे यहां एक ही पोज में मूर्ति के समान बैठी रहती है।
ब्रह्मकुमारी ने बताया कि माता स्वरूप में बैठने वाली ब्रह्मकुमारी बहनें शाम 6.30 से रात 10 बजे तक एक ही मुद्रा सिर्फ 5 मिनिट के लिए झांकी का पर्दा लगाया जाता है। इस दौरान भी ब्रह्मकुमारी बहनें अपने स्थान से ना ही उठती है ना ही स्थान से हटती है। सिर्फ अपने हाथों में लिए शस्त्र को ही कुछ देर के लिए रखती है। उन्होंने बताया कि मेडिटेशन से यह संभव हैं। यहां चैतन्य देवियों की झांकियां देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते है।