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Sunday, 19 September 2021

मिस्त्री संघ के द्वारा भगवान विश्वकर्मा जी का जयंती बड़ी धूमधाम से मनाया गया नगर पंचायत मगरलोड भैंस मुंडी


 
नगर पंचायत मगरलोड भैंस मुडी बाजार चौक एक दिवसी भगवान विश्वकर्मा जी का मूर्ति स्थापना की और बड़ी ही धूमधाम के साथ मिस्त्री संघ एवं कारपेंटर बढ़ाई सभी एवं व्यापारी के द्वारा बड़ी उत्साह पूर्वक के साथ शोभायात्रा निकालकर भगवान विश्वकर्मा जी का जगह-जगह स्वागत किया गया और रात्रि कालीन मनोरंजन कार्यक्रम रखा गया था आसपास के गांव के लोग कार्यक्रम का लुफ्त उठाएं
भगवान विश्वकर्मा जी का विसर्जन करने के लिए बड़ी संख्या में उमड़े भी है नगर के वरिष्ठ नोटरी अधिवक्ता भारत सरकार हेमंत सिन्हा पहुंचे शोभायात्रा में सम्मिलित हुए नगर के महासचिव एवं मित्र संघ 
लालजी साहू लीला राम साहू लालचंद  साहू चमन साहू बोधन साहू भागवत साहू युवराज साहू बोधन यादव उमाशंकर साहू एवं ग्राम के समस्त मिस्त्री संघ एवं पेंटर एवं बढ़ाई  संघ सभी शामिल होकर भगवान विश्वकर्मा जी का शोभायात्रा निकाल निकाल कर तालाब में विसर्जन किया
जानें हर वर्ष 17 सितंबर को ही क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा जयंती:

इस जयंती को लेकर कई मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि अश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि को भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। लेकिन कुछ लोगों का मानना यह भी है कि भाद्रपद की अंतिम तिथि को विश्वकर्मा पूजा करना बेहद शुभ होता है। ऐसे में सूर्य के पारगमन के मुताबिक ही विश्वकर्मा पूजा के मुहूर्त को तय किया जाता है। यही कारण है कि विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर को मनाई जाती है। आइए जानते हैं आखिर कौन हैं विश्वकर्मा भगवान।कौन हैं भगवान विश्वकर्मा:

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में देवताओं के महल और अस्त्र-शस्त्र विश्वकर्मा भगवान ने ही बनाया था। इन्हें निर्माण का देवता कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण की द्वारिका नगरी, शिव जी का त्रिशूल, पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी, पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज, सोने की लंका को भी विश्वकर्मा भगवान ने बनाया था। अत: इसी श्रद्धा भाव से किसी कार्य के निर्माण और सृजन से जुड़े हुए लोग विश्वकर्मा भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं।

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