2300 शिक्षकों (संभाग स्तरीय) के नियुक्ति का रास्ता साफ़ , हाईकोर्ट ने स्थगन किया समाप्त, शिक्षक पद पर नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक हटी, चयनित शिक्षकों में हर्ष
जितेंद्र साहू की खास रिपोर्ट के साथ
बिलासपुर हाईकोर्ट ने विगत डेढ़ साल से चल रहे केस में शिक्षक के पद जो की संभाग संवर्ग का पद है से स्थगन (स्टे) आदेश हटा दिया है | स्टे हटने के बाद अब नियुक्ति आदेश किसी भी दिन जारी किया जा सकता है क्यूंकि दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर संभाग में शिक्षकों का नियुक्ति हो गया है जबकि इसी क्रम में बस्तर और सरगुजा में चयनित शिक्षकों का नियुक्ति आदेश नियुक्ति देने के दो दिन पहले ही रोक दिया गया था | अब बस्तर और सरगुजा संभाग में स्कूलों में शिक्षक जायेंगे जिससे विद्यार्थियों को नए शिक्षक मिलेगा और स्कूल शिक्षक विहीन होगा | ज्ञातव्य है की व्यापम ने 14580 शिक्षकों के भर्ती हेतु विज्ञापन 09 मार्च 2019 को जारी किया था |
राज्य शाशन के परिपत्र के अनुसार बस्तर, सरगुजा संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों व कोरबा जिलों के जिला संवर्ग के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों में केवल उन्ही जिला के उम्मीदवारों को पात्रता मिलने की शर्त थी | मगर इस परीक्षा में उक्त निर्देश को माननीय राजयपाल के द्वारा जारी न रखने हेतु राजपत्र जारी किया गया था जिसके कारन स्थानीय निवासी कोर्ट में उक्त नियम का लाभ देने हेतु याचिका दायर किया था | जिनकी सुनवाई के पश्चात 24 फ़रवरी 2020 को अधिसूचित जिलों में शिक्षक व सहायक शिक्षक के नियुक्ति आदेश जारी करने पर उच्च न्यायलय ने रोक लगा दी थी | जिसमे शिक्षक के पद भी गलती से शामिल कर दिया गया था जो की संभाग संवर्ग का पद है | इससे व्यथित होकर इसे ही आधार बनाकर मेरिट में चयनित कृषि शिक्षक संदीप मंडल, धर्मेंद्र कुमार साहू व प्रेमलता साहू जो की मूलतः बस्तर के निवासी है ने अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव के माध्यम से हस्तक्षेप याचिका प्रस्तुत कर शिक्षक पर लगे स्थगन पर रोक हटाने का आग्रह किया | उन्होंने अपने याचिका में बताया की उनका चयन शिक्षक के पद पर हो चूका है और पूरे राज्य में मेरिट में 12 वें स्थान प्राप्त किया है लेकिन उन्हें नियुक्ति नहीं मिला है | शिक्षक संभाग स्तर का पद है | राज्य शाशन का परिपत्र केवल जिला संवर्ग के पदों पर तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय भर्ती का नियम है जबकि शिक्षक का पद संभाग स्तर का पद है इस कारन इस प्रकरण से उसका कोई सम्बन्ध नहीं है | सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश प्रशांत मिश्रा जी की खंड पीठ ने शिक्षक के पद पर लगी नियुक्ति में रोक को हटा दी, जिससे 2300 पदों में चयनित शिक्षक के नियुक्ति का रास्ता साफ़ हो गया है | इस हेतु प्रशिक्षित डी. एड. बी. एड. संघ के सचिव श्री शुशांत शेखर धरई जी का विशेष योगदान रहा जिन्होंने हर माध्यम से अपने चयनित साथियों के निराशा को हर माध्यम से आगे रहकर दूर किया सही मायने में वो एक टीम के नेता नही जबकि अपने भाई बहनों के जो बेरोजगारी से त्रस्त है उनका मसीहा बनकर उचित सलाह और शासन प्रशासन तक बात पंहुचाते रहे और अंत में यह नियुक्ति का रास्ता भी उन्होंने साफ किया।
