कटु सत्य बातें
करम की गठरी लाद के
जग में फिरे इंसान
जैसा करे वैसा भरे
विधि का यही विधान
कर्म करे किस्मत बने
जीवन का ये मर्म
प्राणी तेरे भाग्य में
तेरा अपना कर्म।
चुन चुन लकड़ी महल बनाया
मुरख कहे घर मेरा
ना घर तेरा ना घर मेरा
चिड़िया रैन बसेरा
जब तक पंछी बोल रहा है
सब राह देंखे तेरा
प्राण पखेरु उड़ जाने पर
कौन कहेगा मेरा
लख चौरासी भोगकर,मुश्किल से
मानुष देह पाया है
यह संसार कांटे की बाड़ी
उलझ पुलज मर जाना है
क्या लेकर तू आया जगत में
क्या लेकर तू जा जावेगा
तेरे संग क्या जायेगा
जिसे कहता तू मेरा है
चांद सा तेरा बदन यह
ख़ाक में मिल जायेगा
करम की गठरी लाद के
जग में फिरे इंसान
जैसा करे वैसा भरे
विधि का यही विधान
कर्म करे किस्मत बने
जीवन का ये मर्म
प्राणी तेरे भाग्य में
तेरा अपना कर्म
नूतन लाल साहू
