नववर्ष
अश्रु क्युं बनता जा रहा है पानी
नूतन साहू पंचायत स्पेक्टर
जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया,पर
अश्रु क्यूं बनता जा रहा है पानी
जैसे हमने पाई दुनिया
आओ उससे बेहतर करे
अंत यौवन का,अंत जीवन का
मृत्यु लोक में निश्चित है,पर
अश्रु क्यूं बनता जा रहा है पानी
बढ़ता ही जा,निरंतर तू
लक्ष्य पर,आत्मविश्वास के सहारे
सत्कर्म कर,कर्म फल न मिला तो भी
मन में रख संतोष तू, पर
अश्रु क्यूं बनता जा रहा है पानी
प्रभु जी ने दिया है,हर मानव को
चमत्कारी यादें
जो मानव के रूप को बनाती हैं
सुंदर और मधुमय
यदि यादें भूल गया तो भूल गया,पर
अश्रु क्यूं बनता जा रहा है पानी
निम्नता,कटुता और कुटिलता
जगत में कभी कम नहीं होगी
जीने मरने योग्य,जीवन बनाने
आदर्श को अपना लें
धर्म और कर्म से ही होगा
धैर्य संचित
स्वप्न टूट गया तो टूट गया,पर
अश्रु क्यूं बनता जा रहा है पानी
नूतन लाल साहू
तुम मुझे पुकार लो
आ गया हूं नववर्ष
जमीन है न बोलती
न आसमान बोलता
कौन मनुष्य है जो
उम्मीद छोड़कर जिया
तुम मुझे पुकार लो
आ गया हूं नववर्ष
पंथ जीवन का चुनौती
दे रहा है हर कदम पर
आखिरी मंजिल नहीं होती
कहीं भी दृष्टिगोचर
तुम मुझे पुकार लो
आ गया हूं नववर्ष
निरंतर आगे बढ़ता ही जा
लक्ष्य का पथ है बहुत पथरीला
मेरी नयन प्रतीक्षा में खड़े थे
कब आयेगा आशा का नववर्ष
मिल गया मांगा बहुत कुछ
पर कहां संतोष मन में
दोष दुनिया का नहीं हैं
यदि कहीं है, तो दोष मन में
जीवन एक अवसर है
शक्तियां अपनी न जांची
दुनिया अपनी,जीवन अपना
सभी अभिलाषा पूरी कर ले
तुम मुझे पुकार लो
आ गया हूं नववर्ष
