महात्मा
गांधी नरेगा की बदौलत गोटाजम्हरी गांव में सिल्क उत्पादन के लिए 40 एकड़ का
बाग बनकर तैयार हो गया है। इस बाग में अर्जुन (कहुआ) के 65 हजार से अधिक
पेड़ लगाए गए हैं, जिसमें रेशम कीटपालन किए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई
है। गोटाजम्हरी गांव राज्य के धूर नक्सल प्रभावित जिला नारायणपुर की ग्राम
पंचायत बोरण्ड का आश्रित गांव है। वनाच्छादित इस गांव में रेशम पालन शुरू
होने से ग्रामीणों का उत्साह बढ़ गया है। बीते 3 सालों से अर्जुन के बाग को
लगाने से लेकर उसकी देख-भाल में जुटे ग्रामीणों को अब इसके जरिए आय का
स्थायी साधन मिल गया है।
गौरतलब है कि गोटाजम्हरी गांव में रेशम विभाग की निगरानी में मनरेगा
योजना से वर्ष 2016-17 में 40 एकड़ में अर्जुन (कहुआ) का बाग लगाने की
शुरूआत की गई। इस गांव के ग्रामीणों ने अर्जुन का बाग तैयार करने में पूरे
मनोयोग से जुड़कर काम किया और रोपित पौधों की देखभाल की। जिसके एवज में
मनरेगा से उन्हें 18 लाख रूपए से अधिक की राशि मजदूरी के रूप में मिली।
अर्जुन के बाग में सिल्क उत्पादन के लिए गांव के 23 परिवारों को चिन्हिंत
कर उन्हें इसका विधिवत प्रशिक्षण देने के साथ ही रेशम विभाग ने उनकी मदद से
रेशम कीटपालन की शुरूआत कर दी है। जिससे ग्रामीण परिवारों को हर सीजन में
लाखों रूपए की अतिरिक्त आमदनी होगी। गोटाजम्हरी में रेशम उत्पादन की
गतिविधियों के शुरू हो जाने से आस-पास के नक्सल प्रभावित गांव के ग्रामीणों
का रूझान रेशम कीटपालन की ओर बढ़ा है।