करोना काल में ऑनलाइन शिक्षा की चुनौतियां और समाधान
कोविड महामारी के समय में विद्यालय लंबे समय से बंद हैं। विद्यालयों द्वारा बच्चों को मोबाइल व कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। इस ऑनलाइन शिक्षा की कई चुनौतियां अब बच्चों और बालकों के सामने आने लगी हैं । आज हम उन प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधान के विषय में संक्षेप में चर्चा करेंगे। कोविड ने जिस प्रकार से हमारी जीवन शैली को बदला है, उसका बहुत बड़ा प्रभाव बच्चों के खेल कूद और शिक्षा पर पड़ा है । बच्चे आज घरों में कैद होकर रह गए हैं , उन्हें खेलने के लिए मैदान या पार्क में जाने पर प्रतिबंध है और उससे भी बुरी स्थिति विद्यालय बंद होने के कारण बच्चों की शिक्षा की है । हालांकि विद्यालय ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बच्चों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, किंतु दूरदराज के क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या मोबाइल या अन्य उपकरणों की उपलब्धता और तकनीक के साथ बच्चों और उनके पालकों का प्रशिक्षित ना होना आज समस्या के कारण बन रहे हैं। दूसरी ओर जो बच्चे ऑनलाइन शिक्षा और तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं उनके स्वास्थ्य को लेकर और उन्हें मोबाइल की गलत आदत का सामना न करना पड़े, इसकी चिंता भी दिखाई दे रही है। ऐसे में बच्चों और पालकों को निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना होगा- 1. पालक बच्चों को मोबाइल अथवा कंप्यूटर तो अवश्य उपलब्ध कराएं, किंतु उसकी नियमित मॉनिटरिंग स्वयं करते रहें । बच्चों को विद्यालय से जो समय सारणी मिली है, उस समय सारणी को देखें और बच्चा उसी के अनुसार शिक्षा प्राप्त करे। 2. इस बात को सुनिश्चित करें कि ऑनलाइन शिक्षा के बहाने बच्चे अधिक से अधिक डिवाइस का उपयोग न करें बल्कि एक निश्चित समय तक ही तकनीकों का इस्तेमाल करें। 3. पालक इस बात पर अवश्य जोर दें कि बच्चे सिर्फ ऑनलाइन शिक्षा ही ना लें, बल्कि घर में ही शिक्षा के परंपरागत माध्यम अर्थात पुस्तक और कॉपी के माध्यम से पढ़ना और लिखना जारी रखें । 4. अच्छा रहेगा कि पालक प्रतिदिन एक बार आज दिन भर में बच्चे ने कितना कुछ लिखा इस बात पर बच्चे से चर्चा करें । 5. शिक्षा को लेकर बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, उन्हें तनाव मुक्त वातावरण में पढ़ने-लिखने को प्रेरित करें। 6. पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के शारीरिक गतिविधियों का पूरा ख्याल रखें। 7. बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें, उन्हें घर में भाई-बहनों के साथ या अपने साथ खेलने के लिए प्रेरित करें । 8. अपने बच्चों के साथ खुद अच्छे संवाद करें उन्हें परिवार के और समाज के परंपरागत जीवन मूल्यों से अवगत कराएं । 9. बच्चों के शारीरिक के साथ-साथ मानसिक विकास और भावनात्मक विकास पर बल दें, जिससे बच्चा भविष्य में सर्वांगीण विकास से युक्त बेहतरीन नागरिक बन सकें। 10. घर-परिवार का माहौल स्वस्थ व सकारात्मक रखें और समय-समय पर बच्चों के शिक्षकों से बच्चे की प्रगति के सम्बंध में संवाद करते रहें।
