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Monday, 19 October 2020

जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और जनपद पंचायत सदस्य उमेश प्रधान अब तक 33 वें बार रक्तदान किए हैं।


 

पत्रकार कैलाश टांडे

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कोरोना काल में 1,271 महादानियों ने किया स्वैच्छिक रक्त दान

रायपुर, 19 अक्टूबर 2020। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान पखवाड़े में कोरोना काल में भी 1,271  महादानियों ने रक्तदान किया है । पखवाड़े के दौरान प्रदेश के 22 जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया | इस दौरान वैश्विक स्वास्थ्य संकट कोरोना को ध्यान में रखते हुए सभी दिशानिर्देशों का पालन किया गया।

एक अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक शिविर में एकत्रित रक्त को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में संचित किया गया है । ब्लड बैंक से रक्त को जरुरतमंद लोगों की मदद के लिए उपयोग किया जाएगा । राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर में 20, बिलासपुर में 148, महासमुंद में 157, कोंडागांव में 102, दंतेवाड़ा में 33, जगदलपुर में 5, राजनांदगांव में 90, अंबिकापुर में 4, बालोद में 30, कांकेर में 30, कोरिया में 144, बलौदाबाजार में 77, मुंगेली में 34, कर्वधा में 138, कोरबा में 150, बेमेतरा में 3, जशपुर में 1, रायगढ़ में 20, सुकमा में 21 , जांजगीर चांपा में 1, गरियाबंद में 17 और बलरामपुर में 42 लोगों द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान किया गया ।

एड्स कंट्रोल सोसायटी के अतिरिक्त परियोजना संचालक डॉ एसके बिंझवार ने बताया कोरोना संकट के बावजूद रक्तदाताओं ने रक्तदान पखवाड़े में रक्तदान किया। डॉ. बिंझवार ने कहा रक्तदान को समस्त विश्व में सबसे बड़ा दान माना गया है क्योंकि रक्तदान ही है, जो न केवल किसी जरूरतमंद का जीवन बचाता है बल्कि उसकी  जिंदगी बचाकर उस परिवार के जीवन में खुशियों के ढ़ेरों रंग भी भरता है। कल्पना कीजिए कि कोई व्यक्ति रक्त के अभाव में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है और आप एकाएक उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं और आपके द्वारा किए गए रक्तदान से उसकी जिंदगी बच जाती है तो आपको कितनी खुशी होगी।


रक्तदान से आपात कालीन समय में रक्त के अभाव में असमय होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम किया जा सकता है। डॉ. बिंझवार ने बताया, हर साल अक्टूबर महीने में दो सप्ताह तक सभी ब्लड बैंकों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते  है। वर्ष 2019 में स्वैच्छिक रक्तदान पखवाड़े के दौरान 2,400 यूनिट रक्त संग्रहित किए गए थे। इस वर्ष कोराना वायरस के बावजूद भी 1,271  यूनिट यानी लगभग 50 फीसदी से ज्यादा रक्त संग्रह हुआ है। जबकि वर्ष 2019 में अक्टूबर महीने में 8,555 यूनिट रक्त संग्रह किए गए थे। उन्होंने कहा दरअसल रक्तदान के महत्व को लेकर किए जा रहे प्रचार-प्रसार के बावजूद आज भी बहुत से लोगों में कुछ गलत धारणाएं विद्यमान हैं, जैसे रक्तदान करने से संक्रमण का खतरा रहता है, शरीर में कमजोरी आती है, बीमारियां शरीर को जकड़ सकती हैं ।

जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता और जनपद पंचायत सदस्य उमेश प्रधान अब तक 33 वें बार रक्तदान किए हैं। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान करने के बाद उमेश ने कहा थोड़े से प्रयास से अगर किसी की जान बचती है। तो इससे अच्छा सहयोग और क्या होगा जिससे किसी जरुरतमंद परिवार की मुसिबत के घड़ी में चेहरे पर मुस्कान लौट जाए। उन्होंने कहा किसी की जीवन बचाने के लिए मानवता के खातिर रक्तदान करने के दौरान कोरोना संकट का डर नहीं लगता।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार देश में प्रतिवर्ष एक करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ती है।  छत्तीसगढ राज्य की कुल जनसंख्या 2.55 करोड़ के आधार पर 1 प्रतिशत रक्त की आवश्यकता होती है अर्थात 2.55 लाख यूनिट रक्त की प्रतिवर्ष जरूरत पड़ती है। रक्त की आवश्यकता की पूर्ति राज्य के कुल 94 ब्लड बैंकों (31 शासकीय और 63 गैर शासकीय ब्लड बैंक) के माध्यम से किया जाता है | वर्ष 2019-20 में ब्लड बैंकों द्वारा 90 प्रतिशत रक्त यानि कुल 2,31,054 यूनिट रक्त संग्रहण किया गया। वहीं वर्ष 2020-21 (अप्रैल से अगस्त) तक ब्लड बैंकों द्वारा 30 प्रतिशत यानि कुल 67543 यूनिट रक्त संग्रहण किया गया है ।


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