आंगनबाड़ियों के बच्चों का ज्ञानवर्धन मनोरंजक तरीके से करने ’चकमक’ अभियान निभा रहा महत्ती भूमिकालाॅकडाउन अवधि में बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्वक समय बिताने के लिए ’सजग’ कार्यक्रम के तहत दिए जा रहे आॅडियो संदेश - chhattisgarhkaratan

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Tuesday, 5 May 2020

आंगनबाड़ियों के बच्चों का ज्ञानवर्धन मनोरंजक तरीके से करने ’चकमक’ अभियान निभा रहा महत्ती भूमिकालाॅकडाउन अवधि में बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्वक समय बिताने के लिए ’सजग’ कार्यक्रम के तहत दिए जा रहे आॅडियो संदेश


आंगनबाड़ियों के बच्चों का ज्ञानवर्धन मनोरंजक तरीके से करने ’चकमक’ अभियान निभा रहा महत्ती भूमिका
लाॅकडाउन अवधि में बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्वक समय बिताने के लिए ’सजग’ कार्यक्रम के तहत दिए जा रहे आॅडियो संदेश
पत्रकार कैलाश टांडे छत्तीसगढ़ 
धमतरी, 05 मई 2020/ नोवल कोरोना बीमारी के संक्रमण से बचाव के लिए पूरे देश में लाॅकडाउन है। इस दौरान छत्तीसगढ़ में भी महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सभी आंगनबाड़ी केन्द्र बंद हैं। इन केन्द्रों में 03 से 06 साल तक बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा की गतिविधियों को निर्बाध रूप से चलाने के लिए यूनिसेफ के सहयोग से ’चकमक’ अभियान और ’सजग’ कार्यक्रम की शुरूआत प्रदेश के मुखिया श्री भूपेश बघेल ने गत 25 अप्रैल को की। जिले में भी ’चकमक’ अभियान में राज्य स्तर से मिले वीडियो को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग की महत्ता को समझाते हुए ना केवल इन बच्चों के घरों में जाकर अभिभावकों के स्मार्ट फोन में फाॅरवर्ड किया जा रहा है, बल्कि यथासंभव वे स्वयं अभिनय करके बच्चों का ज्ञानवर्धन कर रहीं हैं। इन वीडियो में बालगीत, कविता, कहानियां इत्यादि रोचक तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं, जो कि बच्चों का काफी मनोरंजन भी कर रहे हैं।
इसके अलावा ’सजग’ कार्यक्रम के तहत अभिभावकों के लिए विभाग से प्राप्त आॅडियो संदेश भी सुपरवाईजर और कार्यकर्ता द्वारा स्मार्टफोन में भेजा जा रहा है। इसमें बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन होने पर सजग रहने, उनके साथ गुणवत्तापूर्वक समय बिताने, उनकी कला क्षमता को विकसित करने इत्यादि से संबंधित संदेश हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग श्री एम.डी.नायक ने बताया कि योजना शुरू होने के बाद से अब तक 5243 अभिभावकों को ’सजग’ कार्यक्रम के तहत मिले आॅडियो संदेश और ’चकमक’ अभियान के तहत वीडियो गतिविधियों को फोन पर उपलब्ध कराया गया है। इससे उम्मीद है कि लाॅकडाउन अवधि के दौरान अभिभावक और बच्चों को एक साथ गुणवत्तापूर्वक समय बिताने का अवसर तो मिलेगा ही, बच्चों की बोरियत भी दूर होगी और वे गीत, कविता, कहानी इत्यादि के जरिए नैतिक मूल्यों को समझ सकेंगे।

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