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Friday, 29 May 2020

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा), उत्तर प्रदेशALL INDIA PROGRESSIVE WOMEN'S ASSOCIATION (AIPWA), UTTAR

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा), उत्तर प्रदेशALL INDIA PROGRESSIVE WOMEN'S ASSOCIATION (AIPWA), UTTAR  : के राष्ट्रीय आह्वान पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने आज उत्तर प्रदेश में दिया धरना कर्ज माफी, और रोज़गार की मांग उठाई----------------------29 मई को ऐपवा के आह्वान पर देश भर में स्वयं सहायता समूह (सेल्फ हेल्प ग्रुप) की महिलाओं ने गांव-मोहल्लों में धरना दिया, और महामारी और लॉक डाउन के चलते आपदा की स्थिति में कर्ज माफ़ी और अन्य मांगों को उठाया. उत्तर प्रदेश में लखनऊ ,गाजीपुर , चन्दौली , लखीमपुर , मिर्जापुर ,देवरिया , सीतापुर , सोनभद्र , बनारस , इलाहाबाद । धरने की मुख्य मांगें थीं - *1.स्वयं सहायता समूह में शामिल महिलाओं का कर्ज माफ करो!*  *2.माइक्रो फायनांस कम्पनियों द्वारा दिए गए कर्जों का भुगतान सरकार को करना होगा!* *3. हर समूह को उसकी क्षमता के अनुसार  या कलस्टर बनाकर रोजगार  का साधन उपलब्ध कराओ!**4. एस०एच०जी०(स्वयं सहायता समूह - सेल्फ हेल्प ग्रुप) के उत्पादों की खरीद सुनिश्चित करो!**5. स्वयं सहायता समूह को ब्याज रहित ऋण दो!**6. जीविका कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 15 हजार रुपए मासिक मानदेय दो!*यह धरना गांव - मुहल्ले में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए आयोजित किया गया. धरने का नेतृत्व कर रही ऐपवा राष्ट्रीय कार्यकरिणी सदस्य मीना सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार के 20 लाख करोड़ के  पैकेज की घोषणा में स्वयं सहायता समूह के लिए कुछ नहीं है। सरकार की घोषणा में बस इतना है कि एक साल तक उन्हें लोन की किस्त जमा करने से छूट मिलेगी। कर्ज माफ नहीं होगा, बल्कि उन्हें कर्ज जमा करने के समय में छूट दी गई है। हम सभी जानते हैं कि अन्य तमाम श्रमिक वर्ग की तरह ही लॉकडाउन के कारण महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी बुरी तरह बिगड़ गई है। एक साल के बाद भी लोन चुकता करना उनके लिए संभव नहीं होगा। दूसरी तरफ स्वयं सहायता समूह चलाने वाली प्राइवेट कम्पनियां अभी भी लोन का किस्त जबरन वसूल रही हैं .प्राइवेट कम्पनियों का ब्याज दर ज्यादा और मनमाना है और इस दौर में महिलाओं के लिए यह कर्ज चुकाना संभव नहीं है . सरकार बड़े पूंजीपतियों के कर्जे लगातार माफ करती जा रही है जबकि जरूरत है कि उनसे कर्ज वसूल किया जाए और गरीब महिलाओं को राहत दी जाए। दूसरे, इन समूहों को सरकार रोजगार का साधन उपलब्ध करवाए और इनके बनाए समान की खरीद करे .आर्थिक उपार्जन की व्यवस्था नहीं होने के कारण ये महिलाएं एक बार जो कर्ज लेती हैं तो फिर उस जाल में फंसती चली जाती हैं . ऐपवा उपाध्यक्ष आरती राय  ने कहा कि महिलाओं को मिलने वाले कर्ज पर सरकार को ब्याज वसूलना बंद करना चाहिए और आगे से शून्य प्रतिशत ब्याज पर उन्हें कर्ज दिया जाए .  उन्होंने  कहा कि इस महामारी के दौर में जब कोरोना योद्धाओं को मास्क तक नहीं मिल रहे. तब अगर सरकार ने इन समूहों को मास्क बनाने का काम दिया होता तो सबको मास्क मिलता और इन महिलाओं की कुछ आमदनी होती. लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया.     report by ankit tiwari

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