-ः प्रेस विज्ञप्ति:-
मुजगहन साहित्य सदन में हुआ राजभाषा आयोग का अभिनव आयोजन
कवियों ने सुनायी समसामयिक कविताएं
साहित्य की करें निरंतर साधना - हर्षद मेहता
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग छ.ग. शासन रायपुर के सहयोग से एवं साहित्य संगीत सांस्कृतिक मंच मुजगहन, धमतरी के तत्वावधान में व्याख्यान, सम्मान समारोह एवं काव्यगोष्ठी का आयोजन साहित्य सदन मुजगहन में सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक माननीय श्री हरषद भाई मेहता जी, कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय श्री जे.आर. भगत सचिव छ.ग. राजभाषा आयोग, विशिष्ट अतिथि श्री दुर्गा प्रसाद पारकर वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रवर्तक एम. ए. छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम, श्री चन्द्रशेखर साहू सरपंच ग्राम पंचायत मुजगहन थे इसी तरह सुप्रसिद्ध गीतकार कवि लेखक श्री सीताराम साहू ‘‘ श्याम’’, श्री जगदीश देशमुख जी व्याख्यान माला के अतिथि थे। जयकांत पटेल, द्रोण कुमार सार्वा, पुष्कर सिंह राज, भुवन लाल सोरी, कृष्ण कुमार दीप, माखन लाल साहू, मोहन चतुर्वेदी, कान्हा कौशिक, सुश्री माधुरी डड़सेना कार्यक्रम के आमंत्रित कवि के रूप में उपस्थित थे।
इस गरिमामय कार्यक्रम के माननीय अतिथियों द्वारा माॅं सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एंव माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया तत्पश्चात् उपस्थित समूहों द्वारा छत्तीसगढ़ का राज्यगीत ‘‘अरपा पैरी के धार महानदी हे अपार, इन्द्रावती हा पखारय तोर पइंया’’ का गायन किया गया। अतिथियों का स्वागत संस्था के पदाधिकारियों द्वारा पुष्पमाला एवं पुष्पगुच्छ से किया गया। तत्पश्चात् छत्तीसगढ़ और स्वामी विवेकानंद व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए श्री जगदीश देशमुख ने कहा कि-स्वामी विवेकानंद जी का इतिहास और पूरे भारतवर्ष को समझना है तो स्वामी विवेकानंद जी को पढ़ना होगा। स्वामी विवेकानंद जी छत्तीसगढ़ से बहुत ही प्रभावित हुए खासतौर से मधुचक्र से विशेष प्रभावित हुए। हावर्ड विश्वविद्यालय के छात्र ने स्वामी जी से पूछा- व्हाट इज गीता ? तब स्वामी जी ने उत्तर दिया। आप दो घण्टे फूटबाल खेलिए तब समझ में आ जाएगा कि गीता क्या है। रामकृष्ण परमहंश साक्षात वेद है तथा वेदों का भाल बनकर स्वामी विवेकानंद का भारत वर्ष में जन्म हुआ। विवेकानंद के पढ़े बिना भारत ही क्या विश्व ही समझ में नहीं आता।
गांधी जी की छत्तीसगढ़ यात्रा पर विचार व्यक्त करते हुए श्री सीता राम साहू ’’श्याम’’ ने कहा कि संसार के सबसे बड़े लाईट हाउस महात्मा गांधी जी थे देश की आत्मा को जानना है तो गांधी जी कि विचार व जीवन दर्शन को जानना होगा। छत्तीसगढ़ के लोगों का गांधी जी के प्रति भक्ति भाव के विविध प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया है।
मुख्य अतिथि श्री हरषद मेहता ने राजभाषा आयोग के सहयोग एवं साहित्य संगीत सांस्कृतिक मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी शुभकामना प्रेषित की। छत्तीसगढी भाषा और संस्कृति पर आयोग लगातार काम कर रही है जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी। उन्होने साहित्यकारो को अगाह करते हुए कहा कि साहित्य का छत्तीसगढ महतारी के कर्ज से उऋण होने के लिए साहित्य की निरन्तर साधना करते रहे। अपने अध्यक्षी उदबोधन मे राजभाषा आयोग के सचिव श्री जे.आर.भगत ने कहा कि छत्तीसगढी शिक्षा को प्राथमिक स्तर तक अनिवार्य बनाए रखने के लिए शासन स्तर से प्रयास प्रारंभ हो गया है। छत्तीसगढी छत्तीसगढ की पहचान है आगामी शिक्षा सत्र से पढाई भी शुरू हो जावेगी छत्तीसगढ के राज्यगीत सभी पाठयपुस्तकों मे वर्णन किए जाएंगे। वरिष्ट साहित्यकार एवं प्रवर्तक छत्तीसगढी पाठयक्रम श्री दुर्गा प्रसाद पारकर ने छत्तीसगढी साहित्य के विकास एवं छत्तीसगढिया मन के प्रति मातृभाषा के सम्मान पर बल देते हुए कहा कि हीनभावना से ग्रसित छत्तीसगढीया लोगो को अपनी भाषा के प्रति सम्मान की भावना के साथ आगे आना होगा आगे उन्होने यह भी कहा की दिगरप्रंात भाषा-भाषी की तरह अपनी मातृभाषा का मान रखते हुए गौरवबोध का अनुभव करे। छत्तीसगढ प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री अपनी मातृभाषा और संस्कृति को सहेजने में संवाहक की भूमिका निभा रहे है। जो तारीफे काबिल है। सरपंच श्री चंद्रशेखर साहू ने छत्तीसगढ की बोली-भाषा एवं लुप्त होती खेलो की ओर ध्यान आकृष्ट कराया।
छत्तीसगढ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित काव्यगोष्ठी में आमंत्रित कवियो द्वारा काव्य पाठ किया गया। सुप्रसिद्व गीतकार श्री सीताराम साहू श्याम के दीर्घ साहित्यिक साधना को रेखांकित करते हुए माननीय अतिथियो द्वारा अभिनंदन पत्र, शाल,श्रीफल भेंट कर सम्मानीत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डुमन लाल ध्रुव न किया।
इस अवसर पर हीरालाल साहू ,मन्नम राना, आकाश गिरी गोस्वामी, किरण साहेब, हरिशंकर ध्रुव, श्रीमति कीर्तिलता साहू, श्रीमति हेमा साहू, श्रीमति ललिता साहू, गोपाल शर्मा,मदनमोहन खंडेलवाल, विनोद जैन, डाॅ.एस.एस.ध्रुव,जे.पी.सिग,अखिलेश श्रीवास्तव, विजय चन्द्राकर, तिलक लांगे, कुलदीप सिन्हा, श्रीकांत सरोज, डेमनलाल साहू, घनश्याम साहू,चंद्रहास साहू उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन गोपाल शर्मा ने किया ।
डुमन लाल ध्रुव
कवियों ने सुनायी समसामयिक कविताएं
साहित्य की करें निरंतर साधना - हर्षद मेहता
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग छ.ग. शासन रायपुर के सहयोग से एवं साहित्य संगीत सांस्कृतिक मंच मुजगहन, धमतरी के तत्वावधान में व्याख्यान, सम्मान समारोह एवं काव्यगोष्ठी का आयोजन साहित्य सदन मुजगहन में सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक माननीय श्री हरषद भाई मेहता जी, कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय श्री जे.आर. भगत सचिव छ.ग. राजभाषा आयोग, विशिष्ट अतिथि श्री दुर्गा प्रसाद पारकर वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रवर्तक एम. ए. छत्तीसगढ़ी पाठ्यक्रम, श्री चन्द्रशेखर साहू सरपंच ग्राम पंचायत मुजगहन थे इसी तरह सुप्रसिद्ध गीतकार कवि लेखक श्री सीताराम साहू ‘‘ श्याम’’, श्री जगदीश देशमुख जी व्याख्यान माला के अतिथि थे। जयकांत पटेल, द्रोण कुमार सार्वा, पुष्कर सिंह राज, भुवन लाल सोरी, कृष्ण कुमार दीप, माखन लाल साहू, मोहन चतुर्वेदी, कान्हा कौशिक, सुश्री माधुरी डड़सेना कार्यक्रम के आमंत्रित कवि के रूप में उपस्थित थे।
इस गरिमामय कार्यक्रम के माननीय अतिथियों द्वारा माॅं सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एंव माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया तत्पश्चात् उपस्थित समूहों द्वारा छत्तीसगढ़ का राज्यगीत ‘‘अरपा पैरी के धार महानदी हे अपार, इन्द्रावती हा पखारय तोर पइंया’’ का गायन किया गया। अतिथियों का स्वागत संस्था के पदाधिकारियों द्वारा पुष्पमाला एवं पुष्पगुच्छ से किया गया। तत्पश्चात् छत्तीसगढ़ और स्वामी विवेकानंद व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए श्री जगदीश देशमुख ने कहा कि-स्वामी विवेकानंद जी का इतिहास और पूरे भारतवर्ष को समझना है तो स्वामी विवेकानंद जी को पढ़ना होगा। स्वामी विवेकानंद जी छत्तीसगढ़ से बहुत ही प्रभावित हुए खासतौर से मधुचक्र से विशेष प्रभावित हुए। हावर्ड विश्वविद्यालय के छात्र ने स्वामी जी से पूछा- व्हाट इज गीता ? तब स्वामी जी ने उत्तर दिया। आप दो घण्टे फूटबाल खेलिए तब समझ में आ जाएगा कि गीता क्या है। रामकृष्ण परमहंश साक्षात वेद है तथा वेदों का भाल बनकर स्वामी विवेकानंद का भारत वर्ष में जन्म हुआ। विवेकानंद के पढ़े बिना भारत ही क्या विश्व ही समझ में नहीं आता।
गांधी जी की छत्तीसगढ़ यात्रा पर विचार व्यक्त करते हुए श्री सीता राम साहू ’’श्याम’’ ने कहा कि संसार के सबसे बड़े लाईट हाउस महात्मा गांधी जी थे देश की आत्मा को जानना है तो गांधी जी कि विचार व जीवन दर्शन को जानना होगा। छत्तीसगढ़ के लोगों का गांधी जी के प्रति भक्ति भाव के विविध प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया है।
मुख्य अतिथि श्री हरषद मेहता ने राजभाषा आयोग के सहयोग एवं साहित्य संगीत सांस्कृतिक मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी शुभकामना प्रेषित की। छत्तीसगढी भाषा और संस्कृति पर आयोग लगातार काम कर रही है जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनी। उन्होने साहित्यकारो को अगाह करते हुए कहा कि साहित्य का छत्तीसगढ महतारी के कर्ज से उऋण होने के लिए साहित्य की निरन्तर साधना करते रहे। अपने अध्यक्षी उदबोधन मे राजभाषा आयोग के सचिव श्री जे.आर.भगत ने कहा कि छत्तीसगढी शिक्षा को प्राथमिक स्तर तक अनिवार्य बनाए रखने के लिए शासन स्तर से प्रयास प्रारंभ हो गया है। छत्तीसगढी छत्तीसगढ की पहचान है आगामी शिक्षा सत्र से पढाई भी शुरू हो जावेगी छत्तीसगढ के राज्यगीत सभी पाठयपुस्तकों मे वर्णन किए जाएंगे। वरिष्ट साहित्यकार एवं प्रवर्तक छत्तीसगढी पाठयक्रम श्री दुर्गा प्रसाद पारकर ने छत्तीसगढी साहित्य के विकास एवं छत्तीसगढिया मन के प्रति मातृभाषा के सम्मान पर बल देते हुए कहा कि हीनभावना से ग्रसित छत्तीसगढीया लोगो को अपनी भाषा के प्रति सम्मान की भावना के साथ आगे आना होगा आगे उन्होने यह भी कहा की दिगरप्रंात भाषा-भाषी की तरह अपनी मातृभाषा का मान रखते हुए गौरवबोध का अनुभव करे। छत्तीसगढ प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री अपनी मातृभाषा और संस्कृति को सहेजने में संवाहक की भूमिका निभा रहे है। जो तारीफे काबिल है। सरपंच श्री चंद्रशेखर साहू ने छत्तीसगढ की बोली-भाषा एवं लुप्त होती खेलो की ओर ध्यान आकृष्ट कराया।
छत्तीसगढ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित काव्यगोष्ठी में आमंत्रित कवियो द्वारा काव्य पाठ किया गया। सुप्रसिद्व गीतकार श्री सीताराम साहू श्याम के दीर्घ साहित्यिक साधना को रेखांकित करते हुए माननीय अतिथियो द्वारा अभिनंदन पत्र, शाल,श्रीफल भेंट कर सम्मानीत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डुमन लाल ध्रुव न किया।
इस अवसर पर हीरालाल साहू ,मन्नम राना, आकाश गिरी गोस्वामी, किरण साहेब, हरिशंकर ध्रुव, श्रीमति कीर्तिलता साहू, श्रीमति हेमा साहू, श्रीमति ललिता साहू, गोपाल शर्मा,मदनमोहन खंडेलवाल, विनोद जैन, डाॅ.एस.एस.ध्रुव,जे.पी.सिग,अखि
डुमन लाल ध्रुव