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Wednesday, 4 March 2020
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रेत उत्खनन के लिए खदान संचालक पर्यावरण नियमों का गम्भीरता से पालन करेंअपर कलेक्टर ने बैठक लेकर दी समझाइशधमतरी, 04 मार्च 2020/ जिले में संचालित रेत खदानों के संचालकों व पट्टेदारों की बैठक लेकर अपर कलेक्टर श्री दिलीप कुमार अग्रवाल ने रेत उत्खनन के लिए शासन के प्रावधानों एवं सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पर्यावरण नियमों का अक्षरशः गम्भीरता से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेत खदानों के संचालन के पूर्व सभी आवश्यक व्यवस्थाएं एवं सुविधाएं समय-सीमा में सुनिश्चित करने की बात कही।कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आज अपराह्न आयोजित बैठक में अपर कलेक्टर ने कहा कि आबंटित खदानों के संचालन से पहले निर्धारित क्षेत्र का सीमांकन कराकर निर्धारित खदान क्षेत्र के भीतर ही उत्खनन का कार्य करें तथा नियमानुसार खनन क्षेत्र में नियमानुसार पौधे रोपना सुनिश्चित करें। इसी तरह भारी वाहनों से परिवहन के समय में ट्राॅली में रेत अनिवार्य रूप से तारपोलिन से ढका हुआ होना चाहिए, जिससे वहां से गुजरने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी ना हो। खदान पहुंच मार्गों के किनारे टैंकरों के माध्यम से पानी का छिड़काव भी कराएं तथा अभिवहन पास में सभी काॅलमों की सुस्पष्ट रूप से पूर्ति की जानी चाहिए। इसके अलावा सभी आबंटित खदान क्षेत्रों में रेत की दर सूची और दिशासूचक साइन बोर्ड भी अनिवार्य रूप से लगाए जाने पर जोर दिया गया। डिप्टी कलेक्टर एवं खनिज विभाग के नोडल अधिकारी श्री जितेन्द्र कुर्रे ने खदान पट्टेदारों व अधिमानी बोलीदारों की समस्याएं सुनीं तथा पंचायत निकाय व ग्रामीणों से परस्पर समन्वय स्थापित कर खदानें संचालित करने की बात कही। बैठक में सहायक खनि अधिकारी श्री सनत साहू ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार ही सभी खदानों का नियमानुसार संचालन किया जाना है। जिन लोगों ने खदान एवं खनन स्वीकृति हेतु आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किया है, वे शीघ्रता से यह कार्य पूर्ण कर लें, जिससे लंबित खदानों का आबंटन समय पर सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 33 रेत खदानों का आबंटन किया गया है जिसमें से तीन खदान समूह की पांच खदानें पर्यावरण स्वीकृति के उपरांत संचालित हैं। शेष 14 खदानों की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए प्रकरण प्रक्रियाधीन है। 04 खदानों को पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवेदन किया जा चुका है तथा 08 खदानों को आशय पत्र जारी किया जा चुका है।
रेत उत्खनन के लिए खदान संचालक पर्यावरण नियमों का गम्भीरता से पालन करेंअपर कलेक्टर ने बैठक लेकर दी समझाइशधमतरी, 04 मार्च 2020/ जिले में संचालित रेत खदानों के संचालकों व पट्टेदारों की बैठक लेकर अपर कलेक्टर श्री दिलीप कुमार अग्रवाल ने रेत उत्खनन के लिए शासन के प्रावधानों एवं सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पर्यावरण नियमों का अक्षरशः गम्भीरता से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेत खदानों के संचालन के पूर्व सभी आवश्यक व्यवस्थाएं एवं सुविधाएं समय-सीमा में सुनिश्चित करने की बात कही।कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आज अपराह्न आयोजित बैठक में अपर कलेक्टर ने कहा कि आबंटित खदानों के संचालन से पहले निर्धारित क्षेत्र का सीमांकन कराकर निर्धारित खदान क्षेत्र के भीतर ही उत्खनन का कार्य करें तथा नियमानुसार खनन क्षेत्र में नियमानुसार पौधे रोपना सुनिश्चित करें। इसी तरह भारी वाहनों से परिवहन के समय में ट्राॅली में रेत अनिवार्य रूप से तारपोलिन से ढका हुआ होना चाहिए, जिससे वहां से गुजरने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी ना हो। खदान पहुंच मार्गों के किनारे टैंकरों के माध्यम से पानी का छिड़काव भी कराएं तथा अभिवहन पास में सभी काॅलमों की सुस्पष्ट रूप से पूर्ति की जानी चाहिए। इसके अलावा सभी आबंटित खदान क्षेत्रों में रेत की दर सूची और दिशासूचक साइन बोर्ड भी अनिवार्य रूप से लगाए जाने पर जोर दिया गया। डिप्टी कलेक्टर एवं खनिज विभाग के नोडल अधिकारी श्री जितेन्द्र कुर्रे ने खदान पट्टेदारों व अधिमानी बोलीदारों की समस्याएं सुनीं तथा पंचायत निकाय व ग्रामीणों से परस्पर समन्वय स्थापित कर खदानें संचालित करने की बात कही। बैठक में सहायक खनि अधिकारी श्री सनत साहू ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार ही सभी खदानों का नियमानुसार संचालन किया जाना है। जिन लोगों ने खदान एवं खनन स्वीकृति हेतु आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किया है, वे शीघ्रता से यह कार्य पूर्ण कर लें, जिससे लंबित खदानों का आबंटन समय पर सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 33 रेत खदानों का आबंटन किया गया है जिसमें से तीन खदान समूह की पांच खदानें पर्यावरण स्वीकृति के उपरांत संचालित हैं। शेष 14 खदानों की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए प्रकरण प्रक्रियाधीन है। 04 खदानों को पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवेदन किया जा चुका है तथा 08 खदानों को आशय पत्र जारी किया जा चुका है।
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छत्तीसगढ़ का रत्न समाचार पत्र प्रधान संपादक Name:- Mr.kailash tande