"तहसील स्तरीय सतनामी समाज परिक्षेत्र राजिम ने समाज के गौरव प्रथम आई ए एस संजय डहरिया का किया सम्मान"
पत्रकार कैलाश टांडे राजिम
गरियाबंद राजिम तहसील स्तरीय सतनामी समाज परिक्षेत्र राजिम द्वारा गुरु घासीदास मंदिर परिसर, राजिम में 09 अप्रैल को सतनामी समाज के प्रथम आईएएस अधिकारी श्री संजय डहरिया के सम्मान में आयोजित समारोह अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ संत शिरोमणि गुरुघासीदास बाबा जी के गद्दी आसन पर पूजा-अर्चना, वंदन एवं सतनाम के जयघोष के साथ किया गया।
मुख्य अतिथि आईएएस श्री संजय डहरिया ने अपने विस्तृत एवं सारगर्भित उद्बोधन में युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे यूपीएससी, पीएससी, जेईई एवं नीट की तैयारी के लिए स्पष्ट दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सही रणनीति, समय प्रबंधन, निरंतर अभ्यास एवं आत्मविश्वास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षपूर्ण सफर को साझा करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी बाधा सफलता के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकती।इसी क्रम में उन्होंने अपने जीवन के एक अत्यंत कठिन दौर का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने एक गंभीर बीमारी—कैंसर—से लगभग 8 वर्षों तक संघर्ष किया और अदम्य साहस, सकारात्मक सोच एवं दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उस पर विजय प्राप्त की। उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण सफर को साझा करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी बाधा सफलता के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकती। उन्होंने युवाओं को मोबाइल एवं अन्य व्यसनों से दूरी बनाकर अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।उनका यह अनुभव उपस्थित युवाओं एवं समाज के लोगों के लिए अत्यंत प्रेरणास्पद रहा। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियाँ हमें मजबूत बनाती हैं और निरंतर प्रयास करने वालों के लिए सफलता निश्चित होती है।
डॉ. के. आर. मतावले ने अपने उद्बोधन में सामाजिक एकता को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि जब तक समाज संगठित नहीं होगा, तब तक समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने उच्च तकनीकी, चिकित्सा एवं महाविद्यालयीन शिक्षा को समय की आवश्यकता बताते हुए युवाओं को निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।जिससे कि हम अपने लक्ष्य को कठिन मेहनत से प्राप्त कर सके।
निरीक्षक श्री कृष्ण कुमार जांगड़े ने नशा मुक्ति पर जोर देते हुए कहा कि नशापान समाज और युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने अभिभावकों एवं समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील की कि वे बच्चों के लिए सकारात्मक शैक्षणिक एवं सामाजिक वातावरण तैयार करें, जिससे वे सही दिशा में आगे बढ़ सके उन्होंने बताया कि मैं भी सारंगढ़ के पास छोटे से गांव का निवासी हूँ मेरे में गांव लगभग डॉ,पुलिस,पटवारी सहित विभिन्न विभागों में 70 अधिकारी कर्मचारी है जो हमें शिक्षा के बदौलत प्राप्त हुआ।
प्रगतिशील सतनामी समाज के प्रदेश सचिव श्री दिनेश बंजारे ने “पे बैक टू सोसायटी” की भावना को विस्तार से समझाते हुए कहा कि जो लोग शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ चुके हैं, उनका कर्तव्य है कि वे समाज के कमजोर एवं प्रतिभाशाली बच्चों की मदद करें। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही समाज में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।
डॉ. आनंद मतावले ने अपने उद्बोधन में समाज के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तिकरण पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा के साथ-साथ जागरूकता और नेतृत्व क्षमता भी अत्यंत आवश्यक है, जिससे समाज हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सके।
सतनामी समाज छुरा परिक्षेत्र के सचिव डाहरु कोसले ने शिक्षा को जीवन का मूल आधार बताते हुए युवाओं को नियमित अध्ययन एवं अनुशासन का पालन करने की प्रेरणा दी।
जिला पंचायत सभापति श्रीमती नंदनी कोमल ढीढी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशापान से दूर रहकर संत गुरुघासीदास बाबा जी के बताए मार्ग—सत्य, अहिंसा एवं समानता—को अपने जीवन में अपनाएं और समाज को नई दिशा दें।
डॉ. कविता लाल ,धनेश्वरी डांडे रामविशाल ओगरे लेखक एवं व्याख्याता भागचंद चतुर्वेदी शिक्षक ,गोपचंद बेनर्जी, अध्यक्ष तुलेश्वर घृतलहरें,कार्यकारी अध्यक्ष राकेश मांडरे ,सहदेव बंजारे,मुकेश भारती ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज का विकास तभी संभव है जब शिक्षा, संस्कार और एकता को समान महत्व दिया जाए। उन्होंने महिलाओं एवं युवाओं की भागीदारी को बढ़ाने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में अधिवक्ता श्री दूजलाल बंजारे हरीश टांडे शिक्षक ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि समाज के लिए यह गौरव का क्षण है कि हमारे बीच से निकलकर श्री संजय डहरिया ने देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने इसे समाज के युवाओं के लिए प्रेरणा का जीवंत उदाहरण बताया। ग्राम पंचायत पितईबंद की सरपंच श्रीमती गोदावरी बंजारे ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे समाज आत्मनिर्भर एवं सशक्त बन सकता है। छात्रा यामिनी बघेल ने अंग्रेजी में प्रभावशाली स्वागत भाषण प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, जिसकी सभी ने सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन सचिव सुघरमल आड़े एवं आभार व्यक्त शिक्षक कमलेश बघेल नेकिया।
कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजन, गणमान्य नागरिक, बड़ी संख्या में युवा, छात्र-छात्राएं एवं महिलाएं उपस्थित रहे। आयोजन के अंत में अतिथियों का सम्मान स्मृति चिन्ह साल ,श्रीफल भेंटकर आभार व्यक्त किया गया।
यह सम्मान समारोह न केवल एक गौरवशाली उपलब्धि का उत्सव रहा, बल्कि समाज के युवाओं के लिए संघर्ष, आत्मविश्वास, शिक्षा एवं एकता के माध्यम से आगे बढ़ने की प्रेरणा का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में इनकी सहभागिता रही डॉ आनंद मतावले गुरुजी ,तुलेश्वर घृतलहरे,सुघरमल आड़े सहदेव बंजारे, दुजलाल बंजारे ,राकेश मांडरे,कुलदीप बंजारे, मनहरन लाल घोघरे, रामसिंह घृतलहरे,संतोष डहरिया उपाध्यक्षगण,कोमल ढीढी,किरण टंडन,सनत चेलक, चतुर मंडल,चोवाराम बंजारे, नंदकुमार सक्सेना,कोषाध्यक्ष विष्णु जांगड़े,बेनीप्रसाद सोनवानी,ज्ञानिक गायकवाड़,समाज सेवक राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक भागचंद चतुर्वेदी,कमलेश बघेल,गौतरिहा चेलक ,विनोद टंडन,आशा राम टोंडरे,गणेशु खूंटे,झामसिंह सोनवानी,शेखर बांधे,जीतू खूंटे,गोपाल लहरे,कुलदीप घृतलहरे,देवचन्द बांधे,विश्वनाथ सोनवानी,मिलाप बंजारे,खेलन घृतलहरे,रामसागर डहरिया,गोविंद चतुर्वेदी,भोयेश चतुर्वेदी,हिमांशु बघेल, शिवा मांडरे , हेमनारायण मल्होत्रा,नरेंद्र रात्रे ,छुरा परिक्षेत्र अध्यक्ष समारू कोसले,लक्ष्मीदास सोनवानी, दीनदयाल टंडन ,गौकरण घृतलहरे, बलवंत बघेल,आत्मा राम सोनवानी,धनेश्वरी डांडे,भुनेश्वरी बंजारे,संतोषी पुर्रे,सुनीता चतुर्वेदी,बिमला बघेल, ऋचा रात्रे,कृष्णा भारती,यामिनी बघेल पंथी नर्तक दल के कलाकार सहित सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

