*फोन पे वसूली कांड में फिंगेश्वर शिक्षा विभाग घिरा! 260+ स्कूलों से उगाही के आरोप, स्क्रीनशॉट वायरल—कार्रवाई शून्य, अब ‘राजनीतिक संरक्षण’ के आरोप गरमाए*
*पूर्व पंचायत मंत्री अमितेश शुक्ल का बड़ा बयान—“अवैध वसूली कतई बर्दाश्त नहीं, उच्चस्तरीय जांच हो” | एक हफ्ते बाद भी कार्रवाई नहीं, BEO-DEO की कार्यशैली सवालों में*गरियाबंद/फिंगेश्वर,
गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखंड में सामने आए फोन पे वसूली कांड ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। परीक्षा परिणाम और फर्द के नाम पर 177 प्राइमरी, 83 मिडिल और निजी स्कूलों से अवैध वसूली के आरोप, साथ ही फोनपे ट्रांजैक्शन और व्हाट्सऐप आदेश के स्क्रीनशॉट वायरल होने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं होने पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। “अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं”—अमितेश शुक्ल का हमला
इस पूरे मामले पर पूर्व प्रथम पंचायत मंत्री अमितेश शुक्ल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा—“इस तरह की अवैध वसूली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”“इतना बड़ा मामला उजागर होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होना बेहद गंभीर है। “निश्चित रूप से इस पर उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।”
उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक हफ्ते से सोशल मीडिया, अखबार और चैनलों में लगातार यह मामला चल रहा है, तो फिर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
एक हफ्ते बाद भी ‘जीरो एक्शन’—किसका संरक्षण?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े खुलासे के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
क्या इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है? क्या किसी जनप्रतिनिधि, मंत्री या प्रभावशाली व्यक्ति का दबाव है?
अमितेश शुक्ल ने सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि—
“अगर राजनीतिक संरक्षण मिला है, तो कांग्रेस पार्टी इसका जोरदार विरोध करेगी।”
“जरूरत पड़ी तो उच्च स्तर पर लिखित शिकायत कर जांच की मांग की जाएगी।”
BEO-DEO की कार्यशैली पर सवाल मामले में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। BEO स्तर पर बिना आदेश इतनी बड़ी वसूली संभव नहीं मानी जा रही। DEO द्वारा “कोई आदेश नहीं” कहने के बावजूद अब तक कार्रवाई न होना भी संदेह पैदा कर रहा है।
अब सवाल यह उठता है—
जिस नंबर पर फोन पे से पैसा गया, उसकी जांच क्यों नहीं हुई? वायरल स्क्रीनशॉट में दिख रहे नंबरों पर कार्रवाई क्यों नहीं? “शिक्षा के मंदिर” में भ्रष्टाचार? शिक्षकों और आम लोगों का कहना है कि शिक्षा विभाग, जिसे “शिक्षा का मंदिर” कहा जाता है, वहां इस तरह की अवैध वसूली सामने आना बेहद चिंताजनक है।
परीक्षा के लिए जब शासन से बजट आता है, तो फिर पैसा क्यों वसूला गया?
किसके कहने पर व्हाट्सऐप में सूचना डाली गई? फोन कर पैसे मांगने वाले कौन लोग हैं? बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?अब पूरा मामला इन सवालों के इर्द-गिर्द घूम रहा है—क्या यह अकेले किसी कर्मचारी का खेल है या पूरा सिस्टम शामिल है?
क्या बिना BEO की जानकारी के यह संभव है? और सबसे अहम—कार्रवाई क्यों नहीं? कांग्रेस का ऐलान—“चुप नहीं बैठेंगे”
अमितेश शुक्ल ने साफ कहा—
“भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगा।”
“यदि इसमें राजनीतिक संरक्षण मिला है, तो हम उच्च स्तर तक लड़ाई लड़ेंगे।” फिलहाल, फोनपे वसूली कांड में डिजिटल सबूत सामने हैं, आरोप गंभीर हैं, लेकिन कार्रवाई अब भी शून्य है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि—प्रशासन कब तक चुप रहता है? और क्या इस मामले में सच सामने आ पाएगा या नहीं