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Tuesday, 20 January 2026

शिव संयुजस्य स्वामी अनुराज जयंती समारोह एवं अमृत आनंद महोत्सव गुरुधाम तरीघाट में श्रद्धा और साधना के साथ सम्पन्न"





गुरुधाम तरीघाट में आयोजित दो दिवसीय 18,19जनवरी को शिव संयुजस्य स्वामी अनुराज जयंती समारोह एवं अमृत आनंद महोत्सव का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और साधना के वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस पावन अवसर पर गुरुधाम के परम संरक्षक,संचालक पूज्य गुरुजी डॉ. आनंद मतावले के सान्निध्य में साधकों, शिष्यों एवं श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में पूज्य गुरुजी डॉ. आनंद मतावले ने व्यास पीठ से उपस्थित साधक-शिष्यों को मंत्र, दीक्षा, साधना, साबर मंत्र, गुप्त नवरात्रि, बसंत पंचमी एवं नील तारा साधना जैसे गूढ़ और दुर्लभ आध्यात्मिक विषयों पर विस्तारपूर्वक प्रवचन दिया। अपने ओजस्वी एवं सरल वाणी में गुरुजी ने साधना के वास्तविक स्वरूप, गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता तथा आत्मकल्याण के मार्ग को अत्यंत सहज रूप में समझाया।अंतरमुखी होने के लिए चक्र साधना के बारे मे भी बताया गया एकम ब्रम्हा सकल जगत को समझना होगा ।पूज्य गुरुजी ने कहा कि मंत्र और दीक्षा केवल शब्द या विधि मात्र नहीं हैं, बल्कि वे साधक के जीवन में चेतना जागरण का माध्यम हैं। साबर मंत्र की प्रभावशीलता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि यह लोकजीवन से जुड़ी सरल साधना पद्धति है, जो श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाए तो शीघ्र फलदायी होती है।गुप्त नवरात्रि के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने इसे अंतर्मुखी साधना और सिद्धि प्राप्ति का श्रेष्ठ काल बताया, वहीं बसंत पंचमी को ज्ञान, विवेक और साधना के नवसंकल्प का पर्व बताया।नील तारा साधना पर विशेष प्रकाश डालते हुए गुरुजी ने कहा कि यह साधना साधक को भय, भ्रम और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करती है।प्रवचन के दौरान मंच पर उपस्थित साधक-शिष्य गुरुजी के अमृत वचनों से भावविभोर होकर ज्ञान से संचित होते दिखाई दिए। पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, ध्यान और साधना की दिव्य अनुभूति बनी रही। कार्यक्रम में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लेकर गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।कार्यक्रम का समापन गुरु पूजन,गुरू आरती के साथ सम्पन्न हुआ। शांति धाम साधक कल्याण समिति राजिम तरीघाट द्वारा सभी साधक शिष्यों,श्रद्धालुओं के भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया था।अंत में आयोजकों द्वारा सभी साधक-शिष्यों, श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा स्वामी अनुराज के आदर्शों को आत्मसात करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।यह आयोजन न केवल एक जयंती समारोह रहा, बल्कि आध्यात्मिक चेतना,ज्ञान जागरण और साधना की गहन अनुभूति का अनुपम संगम सिद्ध हुआ।दो दिवसीय अमृत आनंद महोत्सव के सफल आयोजन पर गुरुसत्ता आध्यात्मिक तंत्र ज्योतिष वेलफेयर सोसायटी राजिम के संचालक ,संरक्षक डॉ आनंद मतावले गुरुजी, मां चंकेश्वरी पीठ के पुजारी रामधन जोशी, रामगुलाल साहू, चंद्रशेखर सिन्हा मैनपुर ,गिरीश गजेंद्र बसना,राजू चंद्राकार बागबाहरा, ओंकार साहू, गरियाबंद,तुलेंद्र सागर,टीकवेंद्र जटवार,दीनबंधु निराला महासमुंद, भागचंद चतुर्वेदी,हेमराज साहू, सहदेव बंजारे राजिम,लोकनाथ आंडेय ,भीषलाल साहू सहित पूरे छत्तीसगढ़ से लगभग तीन हजार से अधिक साधक शिष्य उपस्थित रहे।

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