नवापारा राजिम, श्री राम लला का, दर्शन कर निहाल हुए सैकड़ों विदेशी, प्रवासी, लगभग 30 देशों के हजारों राम भक्त भी राम लला के नवनिर्मित मंदिर में पहुंचे और उनके पहले जन्मदिन पर उनसे आशीर्वाद और दर्शन लाभ लिया , इनमे ब्रूनेई, भूटान, केन्या, कजाकिस्तान, मलेशिया, मोजांबिक,नेपाल, नार्वे, सिंगापुर, ताइवान, तिब्बत, युगांडा, रवांडा, गुयाना, स्पेन, संयुक्त अरब अमीरात, मकाऊ, यूनाइटेड किंगडम, नाइजीरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलिंबिया व जर्जिया इत्यादि देशों के लोग थे, उत्तरप्रदेश के संत हृदय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के स्पष्ट दिशा निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए स्थानीय प्रशासन के अधिकारी लगे हुए थे, नगर के ज्योतिष लोचन पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने भी सपत्नीकउनके नवनिर्मित मंदिर में पहला जन्मदिन, पहली राम नौमी में उनके साक्षात दर्शन किए , उन्होंने कहा कि मैं अपने सदगुरू भगवंत रमेश भाई ओझा पूज्य श्री भाई श्री की राम कथा सुनने अयोध्या आया हुआ हूं, इस कथा के आयोजक हमारे छत्तीसगढ़ के ही पत्थलगांव के यजमान बजरंग भाई शर्मा हैं, राम लला को उनकी जननी कौशल्या मैया राजीव लोचन कहकर पुकारती थी, इस बात का जोर देकर उल्लेख हमारे ब्रम्हलीन संत कवि पवन दीवान जी भी अपने प्रवचनों में अक्सर कहा करते थे, तो हम तो अपने राजिवलोचन भगवान का दर्शन करने ही आए हैं और राम नौमी को उनके इस नव्य, भव्य और दिव्य मंदिर में दर्शन करना
जीवन की धन्यता का सर्वोच्च गौरी शिखर है,यह कहना है, नगर के ज्योतिष लोचन पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री का, जो अभी अयोध्या में रामलला का दर्शन करके लौटे हैं मन में अपूर्व शांति का दिव्य अनुभव लेकर लौटे उनकी वाणी इस अलौकिक अनुभव का बखान करते हुए नही अघाती, उन्होंने बताया कि अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच राम नौमी को 40 लाख से अधिक श्रद्धालु भक्त जनों ने जो कि देश विदेश से आए थे, बड़े सुविधापूर्ण शांति के माहौल में दर्शन किए, शासन प्रशासन की ओर से बड़े अच्छे बंदोबस्त किए गए थे, किसी भी राजनेता की वी वी आई पी व्यवस्था नहीं थी, राम पथ और जन्मभूमि परिसर को कई टन फूलों की झालरों से सजाया गया था, पूरे मार्ग पर लाल कालीन बिछाया गया था, गर्मी के मौसम को देखते हुए सुगंधित इत्र मिश्रित जल के फुहारें जगह लगाए गए थे, छिड़काव करती गाडियां घूम रही थी, जगह जगह शरबत , शिकंजी और ओ आर एस का घोल रखा गया थाएक एक पर्यटक का ध्यान ऐसे रखा जा रहा था, जैसे वह उनके घर आया कोई मेहमान हो, सुरक्षा व्यवस्था में लगे स्थानीय पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल, द्रुत रक्षा कार्य बल सभी मुस्तैदी से तैनात थे और सभी का व्यवहार तीर्थ यात्रियों के प्रति बड़े सद्भाव और मिठास से भरा हुआ था, राम मंदिर परिसर में जूते चप्पल रखने की, बैग आदि सामान, मोबाइल रखने की निःशुल्क लॉकर की व्यवस्था थी, जगह जगह पीने के लिए ठंडे पानी की मशीनें लगी हुई थी सैकड़ों शौचालय बने थे,कुल मिलाकर देखा जाय तो विश्व स्तरीय व्यवस्था बनाई गई थी, देश विदेश के न्यूज चैनल वाले रिपोर्टिंग कर रहे थे, उस दिन तो अयोध्या दुनिया का सबसे चर्चित और भीड़ भाड़ वाला शहर बन कर रिकार्ड बना रहा था, शास्त्री जी ने बताया कि राम मन्दिर जितना ज्यादा सुन्दर है उतना ही बड़ा भी बना हुआ है, एक साथ दो ढाई लाख लोग भी परिसर में हो तो पता नही चलता, कोई धक्का मुक्की नही, भगवान के सामने खड़े भक्तों को कोई खदेड़ कर भगा नही रहा था, सभी आराम से दर्शन कर रहे थे और जब भक्त लोग दर्शन करके बाहर निकल रहे थे तो सभी को एक सुन्दर से थैले के भीतर स्टील के डिब्बे में रखकर बेसन के देसी घी से बने बड़े स्वादिष्ट 5 लडडू भी दिए जा रहे थे, जिसे पाकर लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता था, वास्तव में राम लला के भक्तों ने उनका पहला जन्मदिन उनकी जन्मभूमि अयोध्या में बड़े जोश, उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया, उन्होंने बताया कि अभी तो मात्र एक तिहाई काम पूरा हुआ है जब 2 सालों के बाद पूरा मन्दिर परिसर बन जायेगा तो यह विश्व के सबसे अच्छे सर्व सुविधापूर्ण शहरों में गिना जाएगा वैसे हमारे सनातन धर्म में तो सप्त पुरियो में तो अयोधा का नाम सबसे पहले ही आता है, हम सभी हिन्दू सनातन धर्मियों के लिए यह बड़े गौरव और सन्तोष का क्षण है कि 500 सालों के सतत संघर्ष के बाद, अशोक सिंघल, उमा भारती,ऋतुंभरा, अटल आडवाणी और लाखों राम भक्त कार सेवकों के बलिदानों के बाद यह दिन हम लोगों को देखने को मिला है, हम देशवासी इस समय अपने भाग्य की जितनी भी सराहना करें सो कम है, सचमुच यह आजादी का स्वर्णिम अमृत महोत्सव ही चल रहा है, ब्रह्मदत्त ने कहा कि जब हम दर्शन करके निकल रहे थे तो अनेक चैनल वालों ने दर्शनार्थियों को घेर लिया और उनके विचार लेने लगे, मैने भी उनसे बातचीत में बताया कि हम राम लला के ननिहाल छत्तीसगढ़ से आए हैं, राम जी तो इस नाते से हमारे भानजे लगते हैं, यही कारण है कि हमारे छत्तीसगढ़ की धर्म प्राण सरकार वहां पर हर साल राजिम कुम्भ के नाम से धार्मिक मेला लगाती है, जिसमे देश भर के साधु संत, धर्माचार्य, महामंडलेश्वर , जगतगुरु शंकराचार्यजी आते हैं, हमारी सरकार अब तक हजारों लोगों को अयोध्या धाम की तीर्थ यात्रा करा चुकी है, हमारे धर्मस्व, पर्यटन व संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल बड़े संवेदन शील धर्म पारायण व्यक्ति हैं उन्होंने कहा कि अयोध्या राम लला की जन्मभूमि थी, है और सदा रहेगी, राम भारतीय संस्कृति के प्राण है, राम तो सबके हैं, राम वह ज्योति है, जिससे हर प्राणी की आत्मा प्रकाशित है, प्रत्येक जाति व धर्म पर आस्था रखने। वालों के हृदय में राम बसते हैं, देश में सुख शांति और समृद्धि लाने के लिए राम जन्म भूमि पर भव्य दिव्य मन्दिर के नवनिर्माण से भारतीय संस्कृति का पुनः जागरण होगा और फिर एक बार हमारा देश सोने की चिड़िया कहलायेगा हमारे जन नायक प्रधान मंत्री जी इस दिशा में दिन रात काम कर रहे हैं और सबके सद्प्रयासों से यह देश विश्व की अर्थव्यवस्था का सिरमौर बनेगा, वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को सारा संसार अपनाएगा फिर से राम राज्य आएगा और भारत उसका मार्गदर्शक नेतृत्वकर्ता बनेगा
